आखिरी सत्र से उम्मीद

नई दिल्ली Updated Mon, 03 Feb 2014 07:29 PM IST
hope from last session
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने एक साक्षात्कार में कहा था कि संसद की गरिमा वापस लौटाई जा सकती है, बशर्ते सरकारें और विपक्ष खुले दिल से एक-दूसरी की बातें सुनें, बशर्ते उनके रणनीतिकार आधा सच न छिपाएं....। किसी और संदर्भ में कही गई उनकी बातें पंद्रहवीं लोकसभा के संदर्भ में प्रासंगिक लगती हैं, जिसके पास विधायी कार्यों के लिए अब मुश्किल से एक पखवाड़ा भी नहीं रह गया है।

यूपीए सरकार और विपक्ष के बीच लगातार जिस तरह से अविश्वास गहराता गया है, उसमें यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि इन बचे-खुचे दिनों में महत्वपूर्ण विधायी कार्य हो पाएंगे, वैसे भी इस सत्र में लेखानुदान पास होना है। लोकसभा में अभी 72 विधेयक लंबित हैं, और यदि राज्यसभा में अटके विधेयकों की संख्या को जोड़ दिया जाए, तो इनकी संख्या 126 हो जाती है।

इन अटके विधेयकों में भ्रष्टाचार से संबंधित छह विधेयकों के साथ ही महिला आरक्षण, तेलंगाना, प्रत्यक्ष कर सुधार, वस्तु एवं सेवा कर और बीमा संबंधी बिल भी शामिल हैं। मगर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों से घिरी यूपीए सरकार अपनी सुविधा से भ्रष्टाचार, तेलंगाना और महिला आरक्षण विधेयकों को पारित करवाने की तत्परता दिखा रही है। हैरत की बात है कि इन विधेयकों की सुध सरकार को अब आ रही है, जब आम चुनाव अत्यंत नजदीक हैं।

दूसरी ओर विपक्ष का रवैया भी उसके प्रति सहयोगात्मक नहीं है, तो इसलिए कि वह सरकार को किसी तरह का श्रेय नहीं लेने देना चाहता। बात सिर्फ इस सत्र की नहीं है, इस पूरी लोकसभा में यूपीए और भाजपा के बीच टकराव की स्थिति बनी रही, जिसका असर विधायी कार्यों पर पड़ा है। बची-खुची कसर तेलंगाना की राजनीति और विभिन्न मुद्दों पर छोटे दलों के टकराव ने पूरी कर दी। निश्चय ही संसद को सुचारू रूप से चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की होती है, मगर विपक्ष के रचनात्मक सहयोग के बिना यह संभव नहीं है।

भारतीय संसदीय प्रणाली के लिए यह चिंता की बात है कि साल में संसद की सौ बैठकें भी नहीं हो पाती हैं। राजनीतिक और चुनावों सुधारों की बातें अकसर की जाती हैं, मगर क्या संसद में राजनीतिक दलों के व्यवहार और विधायी कार्यों को भी इस बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए?

Spotlight

Most Read

Other Archives

शहरियों ने कटा दी नाक, सिर्फ 58.89 फीसदी मतदान

बिंदकी समेत अन्य ने की पूरी मेहनत, रहे अव्वल हथगाम ने इस बार भी बाजी मारी, पांच फीसदी उछला

30 नवंबर 2017

Other Archives

35 घायल

28 नवंबर 2017

Related Videos

भोजपुरी की 'सपना चौधरी' पड़ी असली सपना चौधरी पर भारी, देखिए

हरियाणा की फेमस डांसर सपना चौधरी को बॉलीवुड फिल्म का ऑफर तो मिल गया लेकिन भोजपुरी म्यूजिक इंडस्ट्री में उनके लिए एंट्री करना अब भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है।

22 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper