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ठंड से ठिठुरते लोग

Wed, 02 Jan 2013 11:56 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Wed, 02 Jan 2013 11:56 PM IST
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homeless brave winter chill worsened by state apathy

उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में ठंड के भीषण कहर के साथ ही एक बार फिर सरकार तथा प्रशासन की बेरुखी और बदइंतजामी उजागर हुई है। पिछले वर्ष ऐसे ही मौसम में सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बरामदे के बाहर ठिठुरते लोगों की तस्वीरें देखकर दिल्ली सहित तमाम राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि किसी भी व्यक्ति की मौत ठंड से नहीं होनी चाहिए।

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पर लगता है कि उसके इस निर्देश की अनदेखी कर दी गई है। अकेले उत्तर प्रदेश में शीतलहर से अब तक 90 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग या तो तंग झोपड़ियों में, या फिर किसी सहारे की ओट लेकर ठिठुरते हुए रातें गुजारने को मजबूर हैं। पता नहीं, ऐसा क्यों होता है कि ये लोग अक्सर विकास की योजनाओं में पीछे छूट जाते हैं।
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उनके लिए कोई मास्टर प्लान नहीं बनता, नतीजतन उन्हें मौसम की मार सहनी पड़ती है। इनमें से अधिकांश लोग छोटा-मोटा रोजगार करते हैं, जिससे इतनी आय नहीं होती कि वे अपने लिए एक छत का इंतजाम कर सकें। दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य सरकारें बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों का इंतजाम जरूर करती हैं, मगर न तो वे सबके लिए पर्याप्त होते हैं और न ही सुरक्षित। बढ़ती ठंड से उनकी विकट स्थिति की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।
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और मौसम विभाग पर यकीन करें, तो अभी ठंड से जल्दी राहत मिलती नहीं दिख रही है। दिल्ली में ही पारे ने चार दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड के कई हिस्सों में ही नहीं, राजस्थान में भी पारा शून्य के करीब पहुंच चुका है। सवाल है कि शीतलहर और कोहरे से बचने के समय रहते इंतजाम क्यों नहीं किए जाते?


कहीं न कहीं इससे हमारी व्यवस्थागत और नीतिगत खामियां ही उजागर होती हैं। ऐसा भी नहीं है कि इससे सिर्फ निचले तबके के लोग ही प्रभावित होते हैं, ठंड और कोहरे का पूरे जनजीवन पर असर पड़ा है। ट्रेनें घंटों देर से चल रही हैं, सड़कों पर जाम लग जा रहे हैं, हवाई सेवाएं बाधित हैं, बिजली और पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है! यह विडंबना ही है कि हमारे लिए ठंड का मौसम भी किसी आपदा जैसा हो गया है।

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