असहाय वृद्धा को अस्पताल से जबरन निकाला

झज्जर Updated Fri, 09 May 2014 12:48 AM IST
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शहर का ट्रामा सेंटर ड्रामा सेंटर बन गया है। यहां आए दिन किसी न किसी तरह का ड्रामा हो रहा है। कभी किसी डाक्टर के साथ मारपीट हो जाती है, तो कभी मरीज को स्वास्थ्य कर्मियों के गलत बर्ताव का सामना करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार की सुबह भी कुछ ऐसा ही वाकया देखने को मिला।
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यहां भर्ती बेसहारा बुजुर्ग महिला के साथ महिला स्वास्थ्य कर्मियाें ने अभद्र व्यवहार किया। यहां तक की बुजुर्ग महिला को अस्पताल से बाहर निकलने तक को कह दिया गया। स्वास्थ्य कर्मियों के बर्ताव से दुखी महिला आंखों के आंसू नहीं रोक पाई और बिलख कर रोने लगी।
सांखोल निवासी 59 वर्षीया भतेरी देवी के एक हाथ में फ्रैक्चर है। वह ब्लड प्रेशर, शुगर, हर्निया सहित कई बीमारियों से पीड़ित हैं। पति की कुछ साल पहले मृत्यु हो गई थी और संतान कोई है नहीं। वह इलाज के लिए सामान्य अस्पताल-ट्रामा सेंटर में आती रहती थी। पिछले कई दिनों से उन्हें लगातार बुखार आ रहा था। एक बड़े स्वास्थ्य अधिकारी के कहने पर वह ट्रामा सेंटर में आई। उसका यहां इलाज भी चलता रहा।
बृहस्पतिवार की सुबह भतेरी देवी को फिर से बुखार की शिकायत हुई, तो उन्होंने एक स्वास्थ्य कर्मी सुषमा को इंजेक्शन लगाने को कहा। भतेरी ने बताया कि सुषमा ने इंजेक्शन लगाने के बजाय उन्हें बहुत कुछ सुना डाला। पहले से ही बीमारी से परेशान बुजुर्ग महिला से नर्स के शब्द बर्दाश्त नहीं हुए, तो गुस्से में महिला के मुंह से भी कुछ निकल गया। इससे सुषमा ने एक डाक्टर को शिकायत कर दी। तब वह डाक्टर बुजुर्ग महिला के पास पहुंचे और रूम का दरवाजा बंद कर महिला को खरी-खोटी सुनाने लगे। यहां तक कि डाक्टर ने महिला के चोटिल हाथ को झटका और कहा कि कब तक यहां पड़ी रहेगी।

स्वास्थ्य कर्मियों ने पुलिस को बुलाया
इतना सब होने के बाद भी स्वास्थ्य कर्मी नहीं मानी। उन्होंने 100 नंबर पर काल कर पुलिस को बुलाया और बुजुर्ग महिला के खिलाफ ही मारपीट की शिकायत कर दी। भतेरी ने कहा कि वह कई दिन से बीमार है, एक हाथ में फ्रैक्चर है और बढ़ते वजन से परेशान है। यदि जमीन पर बैठ जाऊं तो बिना सहारे खड़ी नहीं हो सकती, मैं भला कैसे किसी के साथ मारपीट कर सकती हूं। बुजुर्ग महिला ने रोते हुए कांपती आवाज में पुलिस कर्मियों को कहा साहब, मैं अकेली हूं और मेरा कोई सहारा नहीं। यहां इलाज के लिए सिर्फ इसलिए आई थी कि अच्छी देखभाल और इलाज हो सके। मगर यहां मेरा इलाज करने के बजाय मुझसे ठीक व्यवहार तक नहीं किया गया। नर्सें मुझे बार-बार अस्पताल से निकल जाने के लिए कहती हैं। मैं खुद को तो संभाल नहीं पा रही तो, कैसे किसी के साथ मारपीट करूंगी।

घटना के लिए डॉक्टर को बताया दोषी
मामला बढ़ता दिखाई दिया तो काम छोड़ कर सभी नर्सें इकट्ठी हो गईं और ट्रामा सेंटर के गेट पर खड़ी हो गई। वे एक स्वर में डाक्टरों को दोष देने लगी और खुद को निर्दोष बताने लगी। कहने लगी कि लापरवाही डाक्टर करते हैं और भुगतना हमेें पड़ता है। डाक्टर मरीज का सही समय और ठीक तरह से इलाज नहीं करते। हमारी कोई गलती नहीं होती, फिर भी हमें मरीजों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। ट्रामा सेंटर में यह ड्रामा होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता रमेश ने मोक्ष सेवा समिति क ी एंबुलेंस मंगाई और भतेरी देवी को इलाज के लिए पीजीआई रोहतक ले गए।

दूसरों को दिया जीवन
बुजुर्ग महिला भतेरी देवी ने जीवनभर दूसरों की सेवा की और कई लोगों को नया जीवन दिया। महिला की सेवा करने वाले नई बस्ती निवासी सतीश ने बताया कि भतेरी देवी हड्डियां जोड़ने में कुशल हैं। उन्होंने बताया कि दस वर्ष पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें मेरे दोनों हाथ एक तरह से खराब हो गए थे। बहुत जगह इलाज कराया, मगर ठीक नहीं हुए। तब उन्होंने भतेरी देवी से संपर्क किया। भतेरी के इलाज से कुछ ही दिन में उसके हाथ ठीक हो गए। भतेरी देवी ने उन्हें नई जिंदगी दी है। सतीश ने कहा कि  जिस महिला ने हमेशा दूसरों की भलाई के लिए कार्य किया, वह किसी के साथ मारपीट नहीं कर सकती।

घटना की कड़ी निंदा की
कई समाज सेवी संस्थाओं से जुड़े रमेश राठी और ईश्वर ने कहा कि यह नाम का ट्रामा सेंटर है यहां रोगियों का इलाज तो दूर, उनसे सही व्यवहार तक नहीं किया जाता। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा एक बुजुर्ग बीमार महिला के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाना शर्मनाक है। समाजसेवियों ने कहा कि कुछ दिनों पहले भी यहां बिहार निवासी एक व्यक्ति इलाज के लिए आया था। उसे प्रारंभिक इलाज तो दे दिया, मगर बाद में उसे बाहर निकाल दिया गया। वह मरीज कई दिन तक ट्रामा सेंटर के बाहर ही पड़ा रहा। इसकी सूचना मिली तो वे खुद उस मरीज को रोहतक स्थित जनसेवा संस्थान में दाखिल कराकर आए।


मरीज भतेरी देवी से संबंधित विवाद की जानकरी उन्हें मिल गई है। उन्होंने इससे वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत करा दिया है। स्टाफ का हमेशा मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास रहता है।
- डॉ.उरेंद्र, आरएमओ, ट्रामा सेंटर
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