लाइफ सेविंग हेलमेट, ब्रेन स्ट्रोक पड़ते ही बजा देगा अलार्म
चूंकि दौरे दो वजह से पड़ते हैं, एक (क्लॉटिंग) खून का जम जाना औऱ दूसरा (ब्लीडिंग) अत्यधिक बह जाना, इसलिए दोनों का इलाज भी अलग तरह से होता है और अभी इसका पता चलने में काफी समय लग जाता है।
अभी समस्या का पता लगाने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन करना पड़ता है लेकिन यह हेलमेट केवल 10 मिनट में ही समस्या और उसकी वजह पता लगा देगा।
यह हेलमेट स्वीडेन के मेडफील्ड डायग्नॉस्टिक्स द्वारा बनाया गया है। यह आंखों के ऊपर, सिर के भाग को ढकता है और इसकी माइक्रो किरणें दिमाग के टिशुओं में जाती हैं जो असल कारण का पता लगाने में मदद करती हैं।
ये हेलमेट फिलहाल एंबूलेंस में मरीजों के लिए बनाया जा रहा है लेकिन जल्द ही इसे सामान्य वाहन चालकों के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाएगा।
कई मरीजों की जान बचाने में करेगा मदद
स्वीडेन के अस्पताल में इसको टेस्ट किया जा रहा है। इस हेलमेट को पराचिकित्सक एंबुलेंस में भी इस्तेमाल कर पाएंगे और अस्पताल पहुंचने से पहले ही जरूरी उपचार शुरू किया जा सकेगा।
अमूमन चार स्ट्रोक पीड़ितों में से एक की मौत हो जाती है और जो बच भी जाते हैं उन्हें तरह तरह की बीमारियां हो जाती हैं जैसे बोलने में परेशानी होना या थोड़ी थोड़ी याद्दाश्त खो जाना।
स्ट्रोक पड़ने के शुरुआती दौर में हर मिनट करीब बीस लाख दिमाग के सेल मर जाते हैं, इसलिए जितना जल्दी इसका पता चलेगा उतना जल्दी दिमाग को ऑक्सीजन पहुंचाई जा पाएगी और उतने ज्यादा दिमागी सेल बचाए जा पाएंगे। इस हेलमेट की खोज वाकई चिकित्सा के क्षेत्र में वरदान बन कर उभर सकती है।