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आईएस की बढ़ती ताकत

Tue, 10 Mar 2015 08:23 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 10 Mar 2015 08:23 PM IST
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growing strength of IS

नाइजीरिया के खूंखार आतंकी संगठन बोको हराम की सीरिया और इराक के बड़े हिस्से में कब्जा करने वाले चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के साथ गठबंधन बनाने की पेशकश को भले ही पश्चिमी जगत में अधिक तवज्जो नहीं दी जा रही है, पर इसे कट्टरपंथियों की बढ़ती चुनौती के रूप में देखने की जरूरत है।

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इस बात की भले ही तुरंत आशंका न हो कि ये दोनों संगठन मिलकर किसी आतंकी कार्रवाई को अंजाम दें, पर इससे यह पता चलता है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक आजादी के लिए खतरा किस तरह बढ़ता जा रहा है। स्कूली लड़कियों को अगवा करने से चर्चा में आया बोको हराम भी लड़कियों की शिक्षा और उनकी स्वतंत्रता के ठीक उसी तरह से खिलाफ है, जिस तरह से इस्लामिक स्टेट।
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बावजूद इसके दोनों संगठनों में बड़ा फर्क यह है कि आईएस ने अमेरिका की अगुआई में उसके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बावजूद सीरिया और इराक के बड़े हिस्से में कब्जा कर रखा है। यही नहीं, आईएस किसी भी चरमपंथी संगठन के मुकाबले बड़ी चुनौती इसलिए भी है, क्योंकि उसने अपना ढांचा तैयार कर रखा है और वह एक राज्य की तरह व्यवहार कर रहा है। अमेरिकी अगुआई वाली ताकतों के दबाव के बावजूद उसने लीबिया में भी विस्तार कर लिया है, जहां उसने दो दिन पहले ही आठ लोगों की हत्या कर कुछ लोगों को अगवा किया है। मगर उसकी चुनौती सिर्फ एक खूंखार आतंकी संगठन की ही नहीं है, जिसे हथियारों से परास्त किया जा सके।
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दरअसल अमेरिका ने भी स्वीकार किया है कि एक अवधारणा के रूप में आईएस का बढ़ता विस्तार उसके लिए बड़ी चुनौती है। सोशल मीडिया के जरिये हुए उसके विस्तार की जद में भारत के कुछ युवक तक आ चुके हैं। लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि उसने फेसबुक और ट्वीटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट पर लगे प्रतिबंध की काट अपनी सोशल नेटवर्किंग साइट बनाकर खोज ली है! दूसरी ओर बोको हराम का दायरा अफ्रीका के सीमित क्षेत्र तक सिमटा हुआ है और आर्थिक संसाधनों के मामले में भी वह आईएस से कमजोर है। इसके बावजूद दोनों के तौर-तरीकों में कोई फर्क नहीं है, जो भीषण हिंसा में यकीन करते हैं। उनमें किसी भी तरह का तालमेल वैश्विक आतंकवाद के बढ़ते खतरे का ही संकेत है।

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