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भगवान के भरोसे बच्चे को छोड़ भागे परिजन
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Sat, 18 Oct 2014 02:31 AM IST
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पीजीआई के आपातकालीन विभाग में एक नवजात बच्चे को छोड़कर उसके परिजन फरार हो गए।
चिकित्सकों ने नवजात को आपातकालीन विभाग के निक्कू वार्ड में भर्ती कराया, जहां उसकी देखभाल जन सेवा संस्थान के कर्मचारी कर रहे हैं। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे के बचने की उम्मीद काफी कम है।
जन सेवा संस्थान के सुपरवाइजर जयवीर और समाज सेवी सुधीर शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह करीब चार बजकर 20 मिनट पर पानीपत निवासी बिंदू आसीन एक नवजात बच्चे के साथ पीजीआई के आपातकालीन विभाग में आई थी।
बच्चे की हालात काफी नाजुक थी। उसकी हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे कमरा नंबर 14 के निक्कू वार्ड में शिफ्ट कर दिया। दोपहर तक बिंदू आसीन और उसके साथ आए बाकी के लोग वार्ड के आसपास ही दिखाई दे रहे थे। लेकिन शाम करीब चार बजे उसने नवजात के परिजनों को पुकारा तो कोई नहीं आया। इसके बाद चिकित्सकों ने जन सेवा संस्थान कार्यकर्ताओं को फोन पर घटना की इत्तला दी। बस तभी से ही संस्थान कार्यकर्ता नवजात की जिम्मेदारी उठाए हुए हैं।
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बचने की उम्मीद है कम
नवजात के बचने की उम्मीद कम है। लेकिन इसके बावजूद चिकित्सक अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रहे हैं। नवजात के परिजनों ने पानीपत का पता लिखवाया था। अब वे कहां और क्यों चले गए। इस बारे में चिकित्सकों को कोई खबर नहीं है।
डा. संदीप, सीएमओ, पीजीआई रोहतक।
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चिकित्सकों ने नवजात को आपातकालीन विभाग के निक्कू वार्ड में भर्ती कराया, जहां उसकी देखभाल जन सेवा संस्थान के कर्मचारी कर रहे हैं। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे के बचने की उम्मीद काफी कम है।
जन सेवा संस्थान के सुपरवाइजर जयवीर और समाज सेवी सुधीर शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह करीब चार बजकर 20 मिनट पर पानीपत निवासी बिंदू आसीन एक नवजात बच्चे के साथ पीजीआई के आपातकालीन विभाग में आई थी।
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बच्चे की हालात काफी नाजुक थी। उसकी हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे कमरा नंबर 14 के निक्कू वार्ड में शिफ्ट कर दिया। दोपहर तक बिंदू आसीन और उसके साथ आए बाकी के लोग वार्ड के आसपास ही दिखाई दे रहे थे। लेकिन शाम करीब चार बजे उसने नवजात के परिजनों को पुकारा तो कोई नहीं आया। इसके बाद चिकित्सकों ने जन सेवा संस्थान कार्यकर्ताओं को फोन पर घटना की इत्तला दी। बस तभी से ही संस्थान कार्यकर्ता नवजात की जिम्मेदारी उठाए हुए हैं।
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बचने की उम्मीद है कम
नवजात के बचने की उम्मीद कम है। लेकिन इसके बावजूद चिकित्सक अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रहे हैं। नवजात के परिजनों ने पानीपत का पता लिखवाया था। अब वे कहां और क्यों चले गए। इस बारे में चिकित्सकों को कोई खबर नहीं है।
डा. संदीप, सीएमओ, पीजीआई रोहतक।