फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   global partnership for enduring growth in agra

सूरत बदलनी चाहिए

Tue, 29 Jan 2013 11:03 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 29 Jan 2013 11:03 PM IST
विज्ञापन
global partnership for enduring growth in agra

आर्थिक मोर्चे पर वैश्विक हताशा के बीच उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में ग्लोबल पार्टनरशिप समिट का आयोजन ध्यान खींचने वाला है। नई आर्थिक नीति लागू करने के बाद पिछले करीब डेढ़ दशकों में कई छोटे राज्यों ने उद्योग-धंधों को वरीयता देकर परिदृश्य बदल दिया है। लेकिन जिस राज्य को राष्ट्रीय राजनीति की नब्ज माना जाता है, वहां आधारभूत सुविधाओं के अभाव और प्रशासन-व्यवस्था की कमी के कारण उद्योग-धंधे लगातार हतोत्साहित हो रहे थे।

विज्ञापन


इस कारण उद्यमी तो राज्य से बाहर निकल ही रहे थे, औद्योगिक रूप से समृद्ध शहरों की पहचान भी लुप्त हो रही थी। कभी भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले कानपुर की पहचान अब गंगा को प्रदूषित करने वाले नगर के रूप में ज्यादा है, तो गन्ना उत्पादक महाराष्ट्र की तुलना में उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की विपन्नता यहां की नीतिगत विफलता का नतीजा।
विज्ञापन


बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने की एक योजना अतीत में राजनीतिक विवाद के कारण दफन हो चुकी है, तो एक्सप्रेस-वे के रास्ते में आई बाधा भी बताती थी कि राज्य को विकास के रास्ते पर ले जाने का कोई रोडमैप नहीं है। हताश करती इस पृष्ठभूमि में आगरा में संपन्न आयोजन से उम्मीद केवल इसलिए नहीं बंधी है कि कुछ विदेशी निवेशकों ने राज्य में निवेश की इच्छा जताई है, बल्कि यह भी कि राज्य और केंद्र सरकारों की प्रतिबद्धता भी इस दौरान सराहनीय रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल्ली-मुंबई कॉरीडोर के तहत दादरी, नोएडा और गाजियाबाद के दो सौ किलोमीटर क्षेत्र का विकास, वस्त्रोद्योग, चमड़ा उद्योग, मसाला, खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा आदि क्षेत्रों को बढ़ावा देने की रूपरेखा और सड़कों के विकास की योजना आदि पर अमल होता है, तो तस्वीर बदलने में इसलिए भी देर नहीं लगेगी, क्योंकि दिल्ली के अलावा उत्तर भारत के विकसित राज्यों से नजदीकी का भी उत्तर प्रदेश को लाभ मिलेगा।


अखिलेश सरकार ने तो सूचना प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, सौर ऊर्जा और पोल्ट्री उद्योग जैसे क्षेत्रों के विकास का खाका भी खींच दिया है। लेकिन यही काफी नहीं है, आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराकर और प्रशासन-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटकर ही निवेशकों का भरोसा हासिल किया जा सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed