फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Gaokao

गाओकाओ

Thu, 09 Jan 2014 07:05 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Jan 2014 07:05 PM IST
विज्ञापन
Gaokao

चीन की राष्ट्रीय उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षा, जिसे गाओकाओ भी कहते हैं, वर्षों से आलोचनाओं के केंद्र में रही है। हाल ही में वहां की सरकार ने इस परीक्षा प्रणाली में कुछ परिवर्तन किया है, जिसे लेकर एक बार फिर बहस का बाजार गर्म है।

विज्ञापन


नए परिवर्तन के मुताबिक, जहां इसके पाठ्यक्रम से अंग्रेजी हटा दिया गया है, वहीं इसकी मूल्यांकन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। मसलन, अब पाठ्येतर गतिविधियों के लिए भी अंक दिए जाएंगे। इन परिवर्तनों को लेकर कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि इससे गरीब एवं ग्रामीण इलाकों के छात्रों को परीक्षा पास करने में मुश्किल होगी, क्योंकि उन्हें बेहतर शिक्षा सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं।
विज्ञापन


गाओकाओ की परीक्षा पास करने के बाद ही हाई स्कूल उतीर्ण छात्रों को कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिल पाता है, इसलिए इसका दबाव वहां के छात्रों एवं अभिभावकों पर बहुत ज्यादा रहता है। चीन में हाई स्कूल की पढ़ाई तीन वर्षों की होती है, इसलिए हाई स्कूल के तृतीय वर्ष के छात्र ही आम तौर पर इस परीक्षा में शामिल होते हैं। वैसे कोई भी इच्छुक व्यक्ति इसके लिए पंजीयन करा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल में एक बार आयोजित होने वाली इस परीक्षा की व्यवस्था हर प्रांत अपने-अपने ढंग से करता है। पूरे देश में एकसाथ दो से तीन दिनों तक जून के महीने में इसका संचालन किया जाता है। इस परीक्षा में तीन विषय सभी छात्रों के लिए अपरिहार्य हैं-चीनी, गणित एवं विदेशी भाषा। विदेशी भाषा के तहत सामान्य तौर पर अंग्रेजी की ही परीक्षा होती थी, लेकिन उसमें जापानी, रूसी या फ्रेंच भाषा का भी विकल्प था। अन्य छह मानक विषयों में तीन विज्ञान एवं तीन मानविकी से संबंधित होते रहे हैं। इस परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा में एक माना जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed