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आतंकी हताशा के हमले
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 05 Dec 2014 08:42 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में भारी मतदान घाटी के मुट्ठी भर अलगाववादियों और पाक प्रायोजित आतंकवादी संगठनों को हमेशा ही हताश करता है, क्योंकि वे सूबे में जिस किस्म की व्यवस्था चाहते हैं, उसमें लोकतंत्र और चुनावों के लिए कोई जगह नहीं है। जम्मू-कश्मीर में हो रहा विधानसभा चुनाव इसीलिए उनकी आंखों की किरकिरी है, लेकिन अब तक चाहकर भी वे इसमें खलल डालने में सफल नहीं हो पा रहे थे, तो इसकी बड़ी वजह सरहदों पर सघन चौकसी है।
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बाढ़ के दौरान सेना और केंद्र सरकार के सहयोगी रवैये ने भी घाटी के लोगों में अलगाववादियों के प्रति झुकाव को कम किया है। दूसरे चरण से पहले हालांकि आतंकवादियों की सुगबुगाहट का नतीजा अरनिया में देखने को मिला था। लेकिन शुक्रवार को एक के बाद एक हुआ आतंकवादी हमला उनकी हताशा और बेताबी का ही ताजा सुबूत है। दरअसल बाकी बचे हुए चरणों में अब घाटी और सरहदों से लगे इलाकों में वोटिंग होनी है, और तीसरे चरण में जिन सोलह विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होना है, वे सभी घाटी में ही हैं, लिहाजा आतंकवादी हर हाल में इनमें बाधा पहुंचाना चाहते हैं।
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इन हमलों के जरिये आगामी सोमवार को घाटी में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं को बाधित करने की भी उनकी मंशा हो सकती है। आतंकवादियों की परेशानी की वजह सिर्फ यह नहीं है कि कश्मीर में भाजपा की बढ़ती सक्रियता के कारण इस बार का चुनाव प्रचार सघन और व्यापक स्तर पर हो रहा है, बल्कि बंद और बहिष्कार के आह्वानों की अनदेखी करते हुए लोग जिस उत्साह के साथ मतदान कर रहे हैं, वह भी लोकतंत्र के इन विरोधियों को रास नहीं आ रहा।
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वैसे तो आतंकियों के मंसूबों को ध्वस्त करने में हमारे जांबाज सुरक्षाकर्मी लगे ही हुए हैं, मतदान के अब तक के दो चरणों में भारी वोटिंग कर हमारे मतदाताओं ने भी उन्हें आईना दिखाया है। जब कुलगाम और कुपवाड़ा में मतदाताओं ने अलगाववादियों की परवाह नहीं की, तो उम्मीद है कि पुलवामा और उड़ी जैसी जगहों में भी भारी संख्या में वोटिंग के लिए निकलकर वे अलगाववादियों की मंशा को करारा जवाब देंगे।