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म्यांमार से दोस्ती का नया अध्याय

Thu, 15 Nov 2012 01:01 AM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 15 Nov 2012 01:01 AM IST
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friendship between myanmar and india

दशकों बाद आंग सान सू की भारत आई हैं, तो यह उनके साथ-साथ खुद हमारे लिए भी भावुक होने का अवसर है। सिर्फ इसलिए नहीं कि उन्होंने जीवन का बड़ा वक्त यहां गुजरा है, बल्कि इसलिए भी कि वर्षों की कैद और सैन्य तानाशाही का जुल्म सहने के बाद अब वह म्यांमार में विपक्ष की नेता हैं, इसलिए उनके आने का राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व है।

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हालांकि सच यह है कि हाल के वर्षों में म्यांमार के साथ भारत के संबंध, सू की की लगभग अनदेखी करते हुए, मजबूत हुए हैं। करीब सप्ताह भर के दौरे पर आईं सू की नई दिल्ली के रुख से न सिर्फ अवगत, बल्कि क्षुब्ध भी हैं, जिसे उन्होंने छिपाया भी नहीं है। वह जब आगाह करते हुए कह रही हैं कि म्यांमार में सैन्य तानाशाही के कथित खात्मे पर नई दिल्ली को अति आशावादी नहीं होना चाहिए, तो उसका आशय यही है कि थ्येन सेन के नेतृत्व में गठित सरकार से भी बहुत उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। सू की की आशंका सही हो सकती है।
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म्यांमार की नई सरकार ने बेशक राजनीतिक और आर्थिक सुधार के कुछ कदम उठाए हैं, पर जिस देश की संसद में सेना के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित हैं, वहां सत्ता और शासन में सैन्य दखल के खत्म हो जाने की उम्मीद करना भोलापन ही होगा! पर इसका यह अर्थ नहीं कि भारत को म्यांमार में लोकतंत्र बहाली की अपनी एक सूत्री मांग पर लौट जाना चाहिए। सू की का क्षोभ अपनी जगह है, इससे भी इनकार नहीं कि मौजूदा दौर में लोकतंत्र के पक्ष में आवाज बुलंद करने वाली इतनी बड़ी शख्सियत कोई और नहीं है, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के हित में यही है कि वह म्यांमार से बेहतर रिश्ते बनाए रखे।
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मुद्दा केवल चीन को फायदा न उठाने देने का नहीं है, सवाल यह भी है कि जब हमें पाकिस्तान की सैन्य तानाशाही से बातचीत में गुरेज नहीं, बीजिंग के कम्युनिस्ट शासन से रिश्ता बनाए रखने में समस्या नहीं, तब लोकतंत्र बहाली की शर्त पर म्यांमार से ही दूरी क्यों बनाए रखनी चाहिए। इसी आलोक में उसके साथ न सिर्फ सुरक्षा, सीमा संबंधी बातचीत, व्यापार एवं यातायात संपर्क से जुड़े समझौते हुए हैं, बल्कि दोनों देशों के शासनाध्यक्षों का दौरा भी हो चुका है। ऐसे में कोशिश यही करनी चाहिए कि आंग सान सू की की यह यात्रा म्यांमार के साथ हमारी दोस्ती को और आगे बढ़ाने में सहायक हो।

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