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क्रिकेट से खेलने वाले

Tue, 25 Mar 2014 08:05 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 25 Mar 2014 08:05 PM IST
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fixing in cricket

इंडियन प्रीमियर लीग में हुई स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च अदालत के भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को पद छोड़ने का आदेश देने के बाद क्रिकेट के इस तमाशे की आड़ में हो रहे गोरखधंधे के बारे में कहने को कुछ नहीं रह जाता। वास्तव में हजारों करोड़ रुपये का आईपीएल सिर्फ फटाफट क्रिकेट और मनोरंजन का कॉकटेल भर नहीं है, बल्कि सट्टेबाजी और फिक्सिंग का बड़ा जरिया भी बन गया है।

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इस प्रकरण की जांच के लिए सर्वोच्च अदालत द्वारा गठित जस्टिस मुदगल की रिपोर्ट ने आईपीएल के काले चिट्ठे को उजागर किया है, जिससे पता चलता है कि यह किस तरह से हितों के टकराव का केंद्र बन गया है। खुद श्रीनिवासन बीसीसीआई के अध्यक्ष तो हैं ही, वह चेन्नई सुपरकिंग के कर्ताधर्ता हैं, इसकी प्रायोजक कंपनी के मालिक भी हैं और उस गुरुनाथ मयप्पन के ससुर हैं, जिसे जस्टिस मुदगल कमेटी ने सट्टेबाजी में लिप्त पाया!
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यही नहीं, भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपरकिंग के भी कप्तान हैं, जिससे कई तरह के अप्रिय सवाल उठते हैं; बावजूद इसके कि धोनी के खिलाफ अभी कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं। इस मामले के सामने आने के बाद से श्रीनिवासन हर तरह के हथकंडे अपनाते हुए बोर्ड पर कब्जा जमाए हुए हैं। फिक्सिंग के आरोपों के सामने आने के बाद से इस खेल को साफ सुथरा करने में बीसीसीआई पूरी तरह नाकाम रही है, तो इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि इस पर ऐसे लोगों का कब्जा रहा, जिन्होंने इसे काली कमाई का जरिया बना लिया।
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बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर श्रीनिवासन की वापसी इसलिए हो सकी थी, क्योंकि बोर्ड के 30 राज्य प्रतिनिधियों में से 29 ने उनका समर्थन किया था। यानी साफ है कि ऊपर से नीचे तक व्याप्त गंदगी की सफाई की जरूरत है। बीसीसीआई दुनिया का सबसे धनी बोर्ड है, जिससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसका दबदबा चलता है।


इसी दबदबे के चलते इसी वर्ष जुलाई में श्रीनिवासन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष तक बनने जा रहे हैं, मगर सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद निश्चिय ही इस पर असर पड़ेगा। वास्तव में बीसीसीआई को गिरोहबंदी से मुक्त करने की जरूरत है, क्योंकि इसके बिना भारतीय क्रिकेट की साख को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

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