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नफरत की आग

Sun, 28 Feb 2016 08:26 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 28 Feb 2016 08:26 PM IST
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परिवार में होने वाले झगड़े और मनमुटाव कभी-कभी कितने विध्वंसक साबित हो सकते हैं, इसका एक दिल दहलाने वाला मामला महाराष्ट्र के ठाणे में सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने सुनियोजित ढंग से अपने परिवार के चौदह लोगों की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली। मारे जाने वालों में से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे, जिससे पता चलता है कि किस क्रूरता के साथ इस हत्याकांड को अंजाम दिया होगा। इस घटना के अभी जो शुरुआती ब्योरे हैं, उनके मुताबिक, मुंबई की एक कंपनी में काम करने वाले व्यक्ति ने शनिवार की रात अपनी सभी बहनों को दावत पर बुलाया था। देर रात को हुए इस खून-खराबे में जीवित बची एक बहन ने, जिसका फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है, अपने शुरुआती बयान में कहा है कि दावत के दौरान किसी तरह का झगड़ा नहीं हुआ था। यह हो सकता है कि सदमे में होने के कारण वह महिला फिलहाल ज्यादा कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हो। या यह भी संभव है, जैसा कि फिलहाल पुलिस मान रही है, कि भोजन में नशीला पदार्थ मिला देने के बाद उस व्यक्ति ने सबके सो चुकने के बाद अचानक देर रात इस हत्याकांड को अंजाम दिया हो। शनिवार की उस काली रात के बारे में अभी बहुत सारी चीजें साफ होनी हैं, लेकिन इतना पता है कि उस महिला की चीख-पुकार के बाद पड़ोसियों ने खिड़की की सलाखें तोड़कर अगर उसे बाहर न निकाला होता, तो वह भी मारी जाती। इस हत्याकांड को अंजाम देने वाला कोई पेशेवर हत्यारा नहीं था, बल्कि उसकी छवि एक खुशनुमा व्यक्ति की थी। तो फिर वह कैसी नफरत थी, जिसमें एक के बाद एक अपने लोगों की हत्या करते हुए भी उसका हाथ नहीं कांपा! अपने परिवारजनों के प्रति आखिर वह किस किस्म की घृणा थी, जिसके तहत उसने देर रात घर के सभी खिड़की-दरवाजे बंद कर अपने मां-पिता-पत्नी-बहनों और बच्चों को मौत की नींद सुलाकर खुद को भी खत्म कर दिया! उम्मीद करनी चाहिए कि इस हत्याकांड का सच हत्यारे की आत्महत्या के बावजूद खत्म नहीं हुआ होगा। इसके रहस्य से पर्दा उठना इसलिए भी जरूरी है, ताकि इसके जरिये परिवारों में व्याप्त अकेलेपन और कई बार उससे उपजते अवसाद और हिंसा पर विराम लगाया जा सके।

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