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दो सितारों का मिलन

Sun, 03 May 2015 07:08 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 03 May 2015 07:08 PM IST
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fight of two stars

लास बेगास में मुक्केबाजी के बहुप्रचारित मुकाबले में जीत हासिल कर फ्लायड मेवेदर जूनियर ने रिंग में अजेय रहने का अपना रिकॉर्ड बरकरार रखा है, तो इस भिड़ंत के जरिये वर्षों बाद बॉक्सिंग के फिर से लोकप्रिय होने की उम्मीद जगी है। मोहम्मद अली, जो फ्रेजियर, माइक टायसन और इवेंडर होलीफील्ड जैसों के कारण मुक्केबाजी के प्रति कभी जो जुनून दिखता था, वह अब वर्षों से नहीं दिखता। इसी कारण पेशेवर मुक्केबाजी के इन दो महारथियों को आमने-सामने लड़ाने की कोशिश पिछले कई वर्षों से हो रही थी।

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चूंकि मेवेदर को रक्षात्मक मुक्केबाजी का सिरमौर माना जाता है, और पैकियाओ की आक्रामक मुक्केबाजी का सुबूत नॉकआउट से ज्यादातर जीत हासिल करने के उनके आंकड़े से मिलता है, ऐसे में, इस मुकाबले के प्रति उत्सुकता स्वाभाविक थी। रिंग के बाहर मेवेदर बदमिजाज माने जाते हैं और पैकियाओ शालीन, पर रिंग में घुसते ही दोनों के स्वभाव विपरीत हो जाते हैं। कदाचित इन्हीं वजहों से पैकियाओ के समर्थक ज्यादा थे; पर्दे पर चैंपियन मुक्केबाज का अभिनय करने वाले सिलवेस्टर स्टैलन से लेकर मैरीकॉम तक उनके पक्ष में थीं।
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लेकिन रिंग पर मेवेदर का जादू बिल्कुल शुरू से चला। यह सिर्फ पैकियाओ के मुक्कों को बचा लेने की उनकी कलाकारी में नहीं, उनके काउंटर पंच में भी साफ दिखा। इन्हीं विशेषताओं के कारण मेवेदर को मौजूदा दौर का श्रेष्ठतम मुक्केबाज कहा जाता है, जिनके मुरीद अपने विजेंदर भी हैं। इसके बावजूद जिस मुकाबले को 'सदी की भिड़ंत' बताया जा रहा था, उसमें वैसा रोमांच कतई नहीं था। दो बड़े मुक्केबाज आमने-सामने थे, फिर भी नॉकआउट तो छोड़िए, किसी को खास चोट तक नहीं लगी! इसकी एक वजह तो यही कि मुकाबले में पहले से सब कुछ तय था, हारने से सट्टेबाजों को छोड़ किसी का कुछ बिगड़ना नहीं था और बाजार ने भी प्रचार के जरिये पहले ही अकूत पैसा कूट लिया था।
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इसके अलावा उन दोनों के दांव-पेच भी बता रहे थे कि उनका समय अब बीत चुका है। मेवेदर इस साल संन्यास लेने वाले हैं, तो पैकियाओ ने 2009 के बाद से कोई मुकाबला नॉकआउट से नहीं जीता है। इसके बावजूद इस भिड़ंत ने मुक्केबाजी के प्रति दुनिया का ध्यान कमोबेश अपनी ओर खींचा है, तो यह छोटी उपलब्धि नहीं है।

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