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पांचवीं बार विश्व चैंपियन

Sun, 29 Mar 2015 07:56 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 29 Mar 2015 07:56 PM IST
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Fifth time world champion

विश्व कप क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया की पांचवीं जीत एक टीम के रूप में उसकी प्रतिभा, क्षमता और धारावाहिकता का विलक्षण नमूना होने के साथ एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास ले रहे उसके कप्तान माइकल क्लार्क के लिए विदाई का शानदार तोहफा भी है। अपनी जमीन पर ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा शुरू से ही भारी बताया जा रहा था, और पहले न्यूजीलैंड को सस्ते में आउट कर, फिर बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए आसान जीत दर्ज कर ऑस्ट्रेलिया ने इसे साबित भी किया।

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दूसरी ओर, न्यूजीलैंड पहली बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचा था, और अब तक की सर्वश्रेष्ठ आंकी जाने वाली कीवी टीम से उम्मीद थी कि वह संन्यास ले रहे श्रेष्ठतम स्पिनर डेनियल विटोरी और कैंसरग्रस्त पूर्व कप्तान मार्टिन क्रो को जीत का तोहफा देगी। लेकिन फाइनल में उसका प्रदर्शन कहीं से भी आश्वस्त करने वाला नहीं था।
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टूर्नामेंट के पहले चरण में हालांकि ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन भी बहुत चमकदार नहीं था; न्यूजीलैंड में मैककुलम के धुरंधरों से हारने के अलावा उसे बांग्लादेश जैसी कमजोर टीम से भी अंक बांटने पड़े थे! लेकिन वही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सेमी फाइनल में भारत को कमोबेश एकतरफा मुकाबले में पराजित किया, फिर फाइनल में न्यूजीलैंड को बहुत आसानी से शिकस्त दी। जबकि प्रदर्शनों के आधार पर भारत और न्यूजीलैंड इस विश्व कप की सबसे शानदार दो टीमें थीं।
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यही दरअसल टीम ऑस्ट्रेलिया की श्रेष्ठता का नमूना है। वह कई बार धीरे-धीरे रंग में आती जरूर है, पर निर्णायक मुकाबलों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को बहुत पीछे छोड़ देती है। खिलाड़ियों को निरंतर बदलते रहने की रणनीति, बड़े मैचों में सबसे ज्यादा खेलने का अनुभव, और तनावों के बीच भी अपना स्वाभाविक खेल खेलते रहने की विशेषता ऑस्ट्रेलिया को दूसरी टीमों से कहीं बेहतर साबित करती है। इसी कारण क्रिकेट, उसमें भी खासकर विश्व कप में उसका वर्चस्व लगातार बना हुआ है।


शुरुआती दो विश्व कप जीतने वाला वेस्ट इंडीज आज अपने स्वर्णिम अतीत की छाया भी नहीं रह गया है, जबकि ग्यारह में से पांच विश्व कप जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने लगातार अपनी श्रेष्ठता साबित की है। ऑस्ट्रेलिया की यह जीत भारत समेत तमाम देशों के लिए प्रेरित होने का अवसर है कि अपनी उपलब्धियों से विचलित हुए बगैर निरंतर किस तरह शिखर पर बने रहा जा सकता है।

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