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इंस्पेक्टर राज की विदाई

Thu, 16 Oct 2014 08:07 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 16 Oct 2014 08:07 PM IST
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farewell of Inspector Raj

तकरीबन ढाई दशक पहले आर्थिक सुधारों के लागू होने के साथ ही लाइसेंस-परमिट राज का खात्मा शुरू हो गया था, जिसके नतीजे भी सामने आए। लेकिन एक बड़ा मुद्दा श्रम सुधारों से जुड़ा रहा है, जिसका औद्योगिक क्षेत्र को लंबे समय से इंतजार रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि, फैक्टरी और श्रम कानूनों के कारण भारत का विनिर्माण क्षेत्र विकास नहीं कर पा रहा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मेक इन इंडिया' की शुरुआत करते हुए साफ कर दिया था कि उनकी प्राथमिकता में यह क्षेत्र सबसे ऊपर है, क्योंकि इसके बिना न तो निवेश आएगा और न ही अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकेगी। 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम' असल में, मेक इन इंडिया कार्यक्रम की ही अगली कड़ी है। इसके तहत घोषित किए गए सुधारों का असर विनिर्माण क्षेत्र में दिखेगा, जिसके लिए काम करना कहीं आसान हो जाएगा। वरना हालत यह रही है कि मामूली आपत्तियों के जरिये कोई भी श्रम निरीक्षक किसी भी औद्योगिक इकाई में ताला लगवा सकता था!
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अब श्रम निरीक्षण के काम में पारदर्शिता लाई जा रही है, जिससे श्रम निरीक्षक एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही एकल खिड़की व्यवस्था से भी निवेशकों को लुभाने में मदद मिलेगी, क्योंकि नई व्यवस्था में फैक्टरी खोलने से संबंधित औपचारिकताओं को कम कर पारदर्शी बनाया जा रहा है।
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हालांकि श्रम सुधारों की जब भी बात की जाती है, तो यह आशंका बनी रहती है कि कहीं इसका मतलब श्रमिक विरोधी नीतियां तो नहीं है। श्रमेव जयते में इन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश दिखती है। मसलन, श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा खासतौर से उनके भविष्य निधि के प्रावधानों को आसान बनाया जा रहा है। भविष्य निधि खाता का सार्वभौमिक नंबर होने से श्रमिकों को बड़ी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, क्योंकि संस्थान बदलने से पीएफ खाता नहीं बदलेगा।


इसके बावजूद यह नहीं भूलना चाहिए कि देश में श्रमिकों की बड़ी संख्या असंगठित क्षेत्र में है, जहां उनका कोई माई-बाप नहीं है। इस क्षेत्र को सामाजिक सुरक्षा देना बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री स्किल इंडिया की भी बात कर रहे हैं, पर हमारे यहां अर्द्ध और अकुशल श्रमिकों की संख्या अधिक है, जिनके कौशल विकास के लिए भी व्यापक कार्यक्रम चलाने की जरूरत है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले दौर के सुधारों में इसे भी ध्यान में रखा जाएगा।

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