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हड़ताल होते ही क्यों याद आत है एस्मा?
अमर उजाला/दिल्ली
Updated Sat, 23 Nov 2013 02:46 PM IST
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उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के एक वर्ग द्वारा की जा रही हड़ताल के मद्देनजर लोकहित में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है।
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एस्मा संसद द्वारा पारित अधिनियम है, जिसे 1968 में लागू किया गया था।
इसके जरिये हड़ताल के दौरान लोगों के जनजीवन को प्रभावित करने वाली अत्यावश्यक सेवाओं की बहाली सुनिश्चित कराने की कोशिश की जाती है।
इसमें अत्यावश्यक सेवाओं की एक लंबी सूची है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन (बस सेवा, रेल, हवाई सेवा), डाक सेवा, स्वास्थ्य सेवा (डॉक्टर एवं अस्पताल) जैसी सेवाएं शामिल हैं।
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हालांकि राज्य सरकारें स्वयं भी किसी सेवा को अत्यावश्यक सेवा घोषित कर सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में एस्मा लागू किया जा सकता है। एस्मा भले ही केंद्रीय कानून है, लेकिन इसे लागू करने की स्वतंत्रता ज्यादातर राज्य सरकारों पर निर्भर है।
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इसलिए देश के हर राज्य ने केंद्रीय कानून में थोड़ा परिवर्तन कर अपना अलग अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम बना लिया है। राज्यों को यह स्वतंत्रता केंद्रीय कानून में ही प्रदान की गई है।
यों तो यह कानून बहुत ही सख्त है, लेकिन इसकी सख्ती अक्सर दिखाई नहीं देती है। हमारे देश में एस्मा कानून का उपयोग आम तौर पर कम ही होता है।
कई बार लंबी हड़ताल के बावजूद सरकारें एस्मा की घोषणा नहीं करती हैं।
ऐसे भी उदाहरण हैं कि एस्मा लागू करवाने के लिए आम नागरिक अदालत की शरण में गए और अदालत के आदेश पर सरकार ने एस्मा लगाया, तो रातोंरात हड़ताल खत्म हुई।
एस्मा लागू हो जाने के बाद हड़ताली कर्मचारियों को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है।