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आतंक के इंजीनियर

Fri, 28 Mar 2014 08:11 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 28 Mar 2014 08:11 PM IST
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enginear of terrorism

इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकियों की दिल्ली पुलिस द्वारा पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई गिरफ्तारी आतंकवाद के मोर्चे पर निश्चय ही बड़ी कामयाबी है। जिन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें मुंबई, हैदराबाद, पटना से लेकर वाराणसी तक में हुए धमाकों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। मगर जिस तरह से यह आतंकी संगठन युवाओं और छात्रों को आतंकी मंसूबों से जोड़ रहा है, वह गहरी चिंता की बात है।

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राजस्थान से गिरफ्तार किए गए मोहम्मद महरूफ और मोहम्मद वकार न केवल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, बल्कि दसवीं और बारहवीं में उन्होंने 94 और 81 फीसदी तक अंक हासिल किए थे! यही नहीं, गिरफ्तार किए गए इन संदिग्ध आतंकियों ने यह चौंकाने वाली जानकारी भी दी है कि आईएम 15 वर्ष तक के किशोरों तक को बरगलाने में सफल हो रहा है। आतंकवाद के मोर्चे पर यह एक बड़ी चुनौती है कि किस तरह से युवाओं को भटकने से रोका जाए। आखिर ऐसे युवा, जिनके सामने सुनहरा भविष्य हैं, कट्टरवादी सोच से कैसे प्रभावित हो जाते हैं, जो उन्हें जेल की सींखचों के अलावा कहीं नहीं ले जाती।
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निश्चय ही इंडियन मुजाहिदीन के फलने-फूलने में पाकिस्तान से मिल रहा खाद-पानी भी जिम्मेदार है, मगर इसकी जड़ें भारत में गहरे तक फैल रही हैं। हालत यह है कि महज पांच-छह वर्ष में आईएम ने पूरे देश में अपना जाल बिछा लिया है। एक बात और गौर करने वाली है कि आतंकवाद के रास्ते पर चलने के पीछे हमेशा आर्थिक कारण नहीं होते।
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मसलन, हाल में जिन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया, उनमें से कई संपन्न घरों से ताल्लुक रखते हैं। जाहिर है, चुनावी मौसम में आईएम के खिलाफ इस अभियान को सिर्फ राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। वास्तव में यह चुनौती कहीं अधिक बड़ी है, जिससे निपटने के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत है।


पाकिस्तान आईएम को भारत जनित आतंकवाद कहकर पल्ला झाड़ता आया है, जिस पर संभवतः नई सरकार ही कोई दबाव बनाए। मगर इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए आतंकवाद के खिलाफ टोल फ्री नंबर की व्यवस्था कर काउंसलिंग जैसी पहल भी की जा सकती है। आखिर भटके हुए युवाओं को रास्ते पर लाना एक जिम्मेदार समाज का कर्तव्य है।

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