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मतदाताओं का हौसला

Wed, 30 Apr 2014 08:48 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Wed, 30 Apr 2014 08:48 PM IST
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Encourage voters

सात राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 89 सीटों के लिए हुए सातवें चरण के मतदान में भीषण गर्मी के बावजूद भारी वोटिंग का सिलसिला जारी रहना उत्साहजनक तो है ही, यह चरण आखिरी सबसे बड़ा चरण होने और कई कद्दावरों की किस्मत का फैसला हो जाने के कारण भी महत्वपूर्ण है।

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मगर लंबी चली आ रही चुनावी प्रक्रिया में मतदाता जिस धैर्य का परिचय दे रहे हैं, वह स्वागतयोग्य है। अच्छी बात यह है कि सात चरणों के मतदान के दौरान कोई बड़ी हिंसक घटना की खबर नहीं है, जो हमारे लोकतंत्र में आ रही परिपक्वता का संकेत है।
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हालांकि मतदान के दिन सभा को संबोधित करने के कारण नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है, तो श्रीनगर में चुनावी हिंसा की घटना हताश करने वाली है। पांच साल पहले इन सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा से आगे रही थी। जबकि इस बार गुजरात और पंजाब में दोनों पार्टियों ने ज्यादा जोर लगाया है, जहां की सभी सीटों पर इस चरण में वोटिंग हुई है।
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नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होने के कारण भाजपा गुजरात में अधिक से अधिक सीटों पर कब्जा करना चाहती है, जबकि पंजाब में सत्ता-विरोधी लहर को कांग्रेस अपने हक में मान रही है। सिर्फ यही नहीं कि पंजाब के शहरी इलाकों में कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ी है, बल्कि वहां पार्टी के तमाम नेता एकजुट होकर लड़ भी रहे हैं। अलबत्ता आंध्र प्रदेश के तेलंगाना इलाके की 17 लोकसभा सीटों पर उसे तेलंगाना राष्ट्र समिति के कारण कुछ अपेक्षा नहीं है, हां, विधानसभा की 119 सीटों के लिए हुए चुनाव में वह कुछ उम्मीद कर सकती है। उस उत्तर प्रदेश की चौदह सीटों पर भी कांग्रेस बहुत उम्मीद शायद ही करे, जहां पिछले चुनाव में उसका प्रदर्शन सबसे अच्छा था। इस बार तो यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच ही दिखाई देता है।


यह चरण भाजपा के लिए खास अहमियत रखता है, पर उसकी मजबूती इससे भी तय होगी कि बिहार और पश्चिम बंगाल की सोलह सीटों में उसे कितनी सीटें मिलती हैं। बिहार की सात सीटों पर नीतीश की हालत खराब है, पर इसका लाभ भाजपा को मिलता है या नहीं, यह देखना बाकी है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भाजपा का बढ़ता वोट प्रतिशत जीत में तब्दील हो, तभी बात बनेगी।

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