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शिखर पर विश्वासघात की सजा

Thu, 25 Oct 2012 08:46 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 25 Oct 2012 08:46 PM IST
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editorial of 26 oct
अमेरिका जाकर सिफर से शिखर छूने की कहानी लिखने वाले रजत गुप्ता का पतन, उन लाखों युवा भारतीयों के लिए गहरा धक्का है, जो कभी उन जैसा बनना चाहते थे। उन्हें अमेरिका की एक अदालत ने भेदिया कारोबार के जरिये धोखाधड़ी करने के आरोप में दो वर्ष की सजा सुनाई है और उन पर 50 लाख डॉलर का जुर्माना भी किया है।
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मैकेंजी के पूर्व प्रमुख के बारे में साल भर पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था कि वह कारोबार में ऐसा फरजीवाड़ा भी कर सकते हैं। अमेरिका के सफलतम प्रवासियों में शुमार रहे गुप्ता की लोकप्रियता का आलम यह था कि जब उन्हें दोषी करार दिया गया, तो उसके बाद पूर्व अमेरिका राष्ट्रपति बिल क्लिंटन तथा माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख बिल गेट्स से लेकर संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान तक ने जज को चिट्ठी लिखकर समाज के व्यापक हित में किए गए उनके योगदान का उल्लेख किया और उनके प्रति रियायत बरतने की अपील की।
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मगर सवाल उठता है कि क्या किसी की सदाशयता या समाजसेवा की वजह से उसके गलत कृत्यों को माफ कर दिया जाए! रजत गुप्ता ने चाहे जो किया हो, उन्होंने उस विश्वास की हत्या जरूर कर दी है, जिसके कारण लोग ईमानदार बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने अपने श्रीलंका मूल के कारोबारी दोस्त राज राजारत्नम को अनजाने में फायदा पहुंचाया।
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हकीकत यह है कि गोल्डमैन सैश और प्रॉक्टर ऐंड गैंबल जैसी कंपनियों के बोर्ड में रहते हुए उन्होंने गोपनीय बैठकों की जानकारी अपने इस मित्र को दी, जिससे उसने करोड़ों डॉलर कमाए। इसमें से एक मामला 2008 के उस दौर का है, जब अमेरिका मंदी से जूझ रहा था। दरअसल मंदी की वजह से ही वहां की संघीय सरकार की नजर भेदिया कारोबार पर गई और उसके बाद से 60 से ज्यादा लोगों को दोषी ठहराया जा चुका है।


रजत गुप्ता सजा को सुनाते हुए जज ने उनकी तारीफ करते हुए कहा है कि इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है, जब अच्छे लोगों ने बुरे काम किए! खुद गुप्ता ने अपने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में छात्रों से कहा था, आप जो कुछ भी करते हैं, उससे आप कुछ न कुछ सीख सकते हैं। अफसोस की बात है कि उन्हें इतिहास में जगह तो जरूर मिलेगी, पर उनसे कोई सफलता के गुर नहीं सीखना चाहेगा!
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