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अब बराबरी का खेल

Wed, 01 Jul 2015 02:27 AM IST
Updated Wed, 01 Jul 2015 02:27 AM IST
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पिछले कुछ वर्षों में एकदिवसीय मैचों में गेंदबाज खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे थे, लिहाजा नियमों में किए गए हालिया बदलाव इसी असंतुलन को दूर करने की कोशिश है।

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क्रिकेट में यों तो शुरू से बल्लेबाजों का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खासतौर से एकदिवसीय मैचों का संतुलन इस तरह बिगड़ गया कि गेंदबाज खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे थे।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने हाल ही में एकदिवसीय मैचों के नियमों में जो परिवर्तन किए हैं, वह इसी असंतुलन को दूर करने की कोशिश है।

भारत के पूर्व कप्तान और मशहूर स्पिनर अनिल कुंबले की अगुआई वाली कमेटी की सिफारिश पर किए गए इन बदलावों में अंतिम दस ओवरों में तीस गज के दायरे से बाहर अब पांच क्षेत्ररक्षक रखने की छूट होगी, शुरुआती दस ओवरों में कैच के लिए क्षेत्ररक्षक रखने की अनिवार्यता खत्म होगी और बैटिंग पॉवर प्ले को खत्म कर दिया गया है।
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दरअसल, अक्तूबर, 2012 में जब खेल के नियमों में बदलाव कर तीस गज के दायरे से बाहर चार खिलाड़ियों की सीमा तय कर दी गई थी, तभी से इसका विरोध भी हो रहा था।

इसके साथ ही बैटिंग पावर प्ले ने क्रिकेट को बल्लेबाजों का खेल बना दिया था। क्रिकेट आंकड़ों का खेल है और यदि मई में हुए विश्व कप के आंकड़ों पर ही गौर करें, तो पता चलता है कि पहली बार तीन टीमें जहां चार सौ रनों का आंकड़ा पार कर गई थीं, वहीं 24 मैचों में स्कोर तीन सौ रनों के पार जा पहुंचा था!

क्रिकेट की कलात्मकता के प्रेमियों के लिए पचास ओवरों में रनों का यह पहाड़ वाकई हैरान करने वाला है। कुंबले कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि एकदिवसीय मैचों में कई बार ऐसा समय आता है, जब ऐसा लगता है कि फील्डिंग कर रही टीम के कप्तान के पास सीमित रक्षात्मक विकल्प उपलब्ध हैं।

यही नहीं, इन नियमों के कारण खासतौर से स्पिनरों की परेशानी बढ़ गई, जिससे उनके खाते में आने वाले विकेट कम होते गए। ऐसे समय जब क्रिकेट की साख पर सवाल उठ रहे हैं, तब उसकी विश्वसनीयता के साथ ही लोकप्रियता और रोमांच को बचाए रखना जरूरी है।


खुद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कह चुके हैं कि चौके-छक्के मैच को उबाऊ बना रहे हैं और वन-डे को ट्वंटी-20 जैसा नहीं होना चाहिए।

ऐसा लगता है कि बाजार के दबाव में क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा आक्रामक बना दिया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नए नियम गेंद और बल्ले के बीच संतुलन कायम करने में मददगार होंगे।

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