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वेन जियाबाओ का कुनबा

Mon, 29 Oct 2012 10:33 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 29 Oct 2012 10:33 PM IST
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Editorial 30 oct

अत्यंत गरीबी से ऊपर उठकर चीन का प्रधानमंत्री बनने वाले वेन जियाबाओ को काफी उदार और भावुक माना जाता है। पद संभालने के बाद ऐसे कई मौके आए हैं, जब उनका मानवीय चेहरा दुनिया ने भी देखा। मगर, न्यूयॉर्क टाइम्स के खुलासे के बाद उनकी इस छवि को गहरा धक्का लगा होगा।

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कोई साल भर की पड़ताल के बाद इस अखबार ने न केवल दावा किया है, बल्कि वह अब भी कायम है कि जियाबाओ की मां, पत्नी, बेटे और उनके भाइयों सहित अन्य रिश्तेदारों ने बीमा, बैंक, दूरसंचार कंपनियों और ढांचागत परियोजनाओं, रेस्तराओं और न जाने किस-किस तरह के कारोबार में कोई पौने तीन अरब डॉलर की हिस्सेदारी हासिल की है।
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चीन की मुश्किल यह है कि वहां न तो भारत की तरह लोकतंत्र है और न ही कोई विपक्ष, वरना वहां भी हमारे यहां जैसा हंगामा देखने को मिलता। बल्कि यह मामला भारत में हुए हाल के खुलासों से कहीं अधिक बड़ा लगता है, क्योंकि हमारे यहां जो घोटाले सामने आए हैं, उनमें इतनी बड़ी राशि को लेकर किसी एक व्यक्ति या एक परिवार पर उंगली नहीं उठाई गई है।
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अब चूंकि वहां की सरकार ने इन खुलासों को खारिज ही कर दिया है, तो किसी भी तरह की जांच का भी सवाल नहीं उठता।  हालांकि साल भर से भ्रष्टाचार को लेकर चीन के भीतर भी काफी उथल-पुथल मची हुई है, मगर ऐसी खबरों को या तो दबा दिया जाता है या खारिज कर दिया जाता है।

इससे पहले इसी साल चीन के उपराष्ट्रपति और भावी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेनामी संपत्ति के बारे में ब्लूमबर्ग नामक समाचार एजेंसी ने खुलासा किया था, मगर चीन ने इस एजेंसी को ही ब्लॉक कर दिया। इसके उलट अपेक्षाकृत कम कद के नेता बो शिलाई के बारे में जो रवैया अख्तियार किया गया, वह यह बताने के लिए काफी है कि कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर भी कम खींचतान नहीं है।


शिलाई उस केंद्रीय समिति के प्रबल दावेदार थे, जिसका चीन की सत्ता पर प्रभावी नियंत्रण होता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी भले यह स्वीकार न करे, मगर वह वाकई मुश्किल दौर से गुजर रही है, क्योंकि वेन जियाबाओ के कुनबे के बारे में यह खुलासा ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी का अगले महीने सम्मेलन होने जा रहा है, जिसमें देश के भावी नेतृत्व को कमान सौंपी जानी है। 

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