विज्ञापन

अपाहिज तर्कों के साथ

नई दिल्ली Updated Mon, 15 Oct 2012 09:40 PM IST
विज्ञापन
Editorial 15 oct
ख़बर सुनें
अशक्त लोगों की मदद से जुड़े केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद की अगुआई वाले ट्रस्ट पर वित्तीय अनियमितता और फरजी दस्तावेजों के आरोप लगने भर से उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मगर पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन के नाम से बने ट्रस्ट के कामकाज को लेकर जो बातें सामने आई हैं, वे संदेह पैदा करती हैं।
विज्ञापन
खुद सलमान खुर्शीद ने भी माना है कि ट्रस्ट के द्वारा आयोजित होने वाले शिविरों और केंद्र सरकार से अनुदान लेने के क्रम में हुई लिखा-पढ़ी के दौरान दस्तावेजों में से कुछ में अधिकारियों के फरजी दस्तख्त पाए गए हैं। सवाल है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आ गई कि अशक्त लोगों की सेवा से जुड़े इस ट्रस्ट को फरजी दस्तख्त का सहारा लेना पड़ा! और जिन लोगों के फरजी हस्ताक्षर की बात सामने आई हैं, उनमें तो एक सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल है।

बेशक सलमान खुर्शीद की व्यक्तिगत ईमानदारी संदेह से परे रही है, और उनका ट्रस्ट ऐसे लोगों की सेवा से जुड़ा हुआ है, जिन्हें समाज अकसर हाशिये पर डाल देता है। यदि ऐसे लोगों के साथ ही छलावा किया जाए, तो क्या उनकी आड़ में सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले ट्रस्ट की निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए? इससे सार्वजनिक जीवन की शुचिता, पारदर्शिता और नैतिकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

यह मामला सिर्फ सलमान खुर्शीद तक सीमित नहीं है, इससे यूपीए सरकार की साख भी जुड़ी है, जिसकी विश्वसनीयता गिरती जा रही है। पखवाड़े भर नहीं हुए, जब रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ की ओर से की गई मेहरबानी का मामला सामने आया था और तब खुर्शीद सहित अनके वरिष्ठ मंत्री उनके बचाव में खड़े हो गए थे। अब तकरीबन वैसे ही तर्कों के साथ कांग्रेस और सरकार खुर्शीद के साथ खड़ी है। इन दोनों प्रकरणों ने भारतीय राजनीति और समाज में चौबीस घंटे चौकस रहने वाले मीडिया के बढ़ते असर को भी रेखांकित किया है।

बेशक अरविंद केजरीवाल और उनके साथी मीडिया की इस भूमिका को बखूबी समझते हैं। मगर उन्हें सिर्फ यह कहकर खारिज नहीं किया जा सकता कि यह उनका भावी राजनीतिक दल के प्रचार का हथकंडा है। वाकई राजनीति अब बदल रही है, राजनीतिकों को सिर्फ संदेह का लाभ नहीं दिया जा सकता।  
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election
  • Downloads

Follow Us