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आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय साथी
नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Oct 2012 08:04 PM IST
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इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकवादी फसीह महमूद की गिरफ्तारी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सऊदी अरब की भूमिका को रेखांकित किया है। 2010 में इस खाड़ी देश के साथ हुई प्रत्यर्पण संधि के बाद रियाद से भारत लाया गया फसीह तीसरा संदिग्ध आतंकी है। इससे पहले इसी साल जून में मुंबई के 26/11 के आतंकी हमले से जुड़े अबू जुंदाल को वहां से भारत भेजा गया था और पिछले महीने ही एक अन्य संदिग्ध रईस की गिरफ्तारी हो सकी थी।
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जांच एजेंसियों को जो सुबूत मिले हैं, उससे पता चलता है कि फसीह महमूद प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के लिए धन जुटाने के साथ ही युवाओं को जोड़ने का काम भी कर रहा था। जाहिर है, अबू जुंदाल की तरह उसकी गिरफ्तारी भी भारत में हुए आतंकी साजिशों के खुलासे में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे भारत में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों की रणनीतियों के बारे में भी पता चल सकता है। चूंकि सऊदी अरब और पाकिस्तान के आपसी रिश्ते भी मजबूत रहे हैं, इसलिए इस खाड़ी देश से भारत को मिल रहे सहयोग से क्षेत्र में बदल रहे समीकरण को समझा जा सकता है।
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यह नहीं भूलना चाहिए कि एक समय सऊदी अरब भी आतंकियों का गढ़ रहा है और अब भी वहां कई ऐसे संदिग्ध मौजूद हैं, जिनकी तलाश हमें है। लेकिन आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की अगुवाई में चलाए जा रहे अभियान में पाकिस्तान के उलट सऊदी अरब कहीं अधिक विश्वसनीय साथी के रूप में उभरा है। जहां तक भारत से उसके आपसी रिश्ते की बात है, तो इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है, लोग रोजगार और कारोबार के सिलसिले में खाड़ी देश जाते रहे हैं। आज भी वहां 20 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं।
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दूसरी ओर सऊदी अरब भारत के लिए तेल का महत्वपूर्ण स्रोत है। आतंकवाद के खिलाफ भारत और इस खाड़ी देश की नजदीकी से पाकिस्तान को तकलीफ हो सकती है, जो अब तक यह मानने को तैयार नहीं है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ ही आगे बढ़ा जा सकता है। सऊदी अरब से मिल रही कामयाबी को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने के बजाय, यदि उसके साथ मिलकर पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके, तो कहीं अधिक कारगर नतीजे मिल सकते हैं।