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पूर्वी चीन सागर- 'हवाई-रक्षा पहचान क्षेत्र'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 27 Nov 2013 08:01 PM IST
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चीन सागर के पूर्वी इलाके को चीन सरकार ने 'हवाई-रक्षा पहचान क्षेत्र' घोषित कर दिया है। इसका यह अर्थ है कि पूर्वी चीन सागर के इलाकों में उड़ने वाले सभी विमानों को चीन का आदेश मानना होगा।
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लेकिन इस घोषणा के साथ ही जापान और चीन के बीच विवाद भी गहरा गया है, क्योंकि पूर्वी चीन सागर में ही जापान के नियंत्रण वाला सेंकाकू द्वीप है, जिस पर चीन सरकार अपना दावा जताती रही है। वह इस द्वीप को दियाओयु कहती है।
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जैसा कि नाम से स्पष्ट है, पूर्वी चीन सागर चीन के पूर्व में स्थित समुद्र है। करीब 12.5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह समुद्र प्रशांत महासागर का हिस्सा है। इस सागर के पूर्व में जापान के नियंत्रण वाले क्यूशू (जापान का तीसरा सबसे बड़ा द्वीप) और युकयु द्वीप (बोलचाल में इसे नानसेई द्वीप भी कहा जाता है) हैं, दक्षिण में ताइवान देश, तो पश्चिम में चीन की मुख्य भूमि है। यह महासागर दक्षिण चीन सागर से ताइवान जलडमरुमध्य के माध्यम से, तो जापान सागर से कोरिया जलडमरुमध्य के माध्यम से जुड़ा है।
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इस सागर में कुछ जाने-माने द्वीप और चट्टान भी मौजूद हैं। मसलन, चीन के नियंत्रण वाला तोंग द्वीप, चीन और दक्षिण कोरिया के स्वामित्व को लेकर विवादित सोकोत्रा चट्टान, हुपीजियाओ चट्टान, याजियाओ चट्टान आदि इसी इलाके में आते हैं। चीन की सबसे लंबी नदी यांगत्सी क्यांग भी बहकर पूर्वी सागर में गिरती है।
पूर्वी चीन सागर अपने समुद्री संसाधनों की वजह से भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे संबंधित विशेष आर्थिक क्षेत्र को लेकर हमेशा से विवाद रहा है। संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों के अनुसार चीन, जापान और दक्षिण कोरिया यहां के संसाधनों पर अपने-अपने दावे करते रहे हैं।