फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   dream of iit

आईआईटी का सपना

Mon, 15 Jul 2013 08:53 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 15 Jul 2013 08:53 PM IST
विज्ञापन
dream of iit

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में सफल होने के बावजूद इस वर्ष जिस तरह से अनेक छात्रों ने देश के शीर्ष प्रौद्योगिकी संस्थान को लेकर बेरुखी दिखाई, उससे साफ है कि आईआईटी की चमक कुछ फीकी पड़ी है। जिन छात्रों ने आईआईटी के बजाय इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलुरु या इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी, हैदराबाद ही नहीं, कमतर समझे जाने वाले एनआईटी जैसे संस्थानों में जाना मंजूर किया, उन्हें आईआईटी में या तो पसंद की ब्रांच नहीं मिली या फिर उन्हें जिन कॉलेजों में दाखिला मिल रहा था, वहां की शैक्षणिक सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं।

विज्ञापन


देश में इस समय 16 आईआईटी हैं, जिनमें कुल 9885 सीटें होती हैं और इस वर्ष इनमें दाखिले के लिए हुई संयुक्त प्रवेश परीक्षा में पांच लाख से भी अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया था। अंतिम स्थिति में 274 छात्रों ने आईआईटी में दाखिला लेने से इनकार कर दिया, जो कुल सीटों का तीन फीसदी से भी अधिक है और यह वाकई चिंता की बात है। असल में बीते कुछ वर्षों में आईआईटी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं, तो उसकी वजहें भी हैं।
विज्ञापन


बीते पांच वर्षों में आठ नए आईआईटी खोले गए, मगर उनमें पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। मसलन हिमाचल प्रदेश के मंडी में शुरू किए गए आईआईटी को ही लें, वहां 90 शिक्षक होने चाहिए, मगर वहां दो तिहाई पद रिक्त हैं! विश्वस्तरीय संस्थानों में दस छात्रों के पीछे एक शिक्षक का अनुपात होता है, लेकिन हमारे दिल्ली, बॉम्बे, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर जैसे पुराने पांच आईआईटी तक में यह स्थिति नहीं है। इसके अलावा बार-बार यह सवाल भी उठाया जाता है कि आईआईटी नवोन्मेष को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसकी तस्दीक दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों और संस्थानों की हैसियत बताने वाली क्वैक्वारेली साइमंड (क्यूएस) रैंकिंग भी करती है, जिसकी सूची में आईआईटी, दिल्ली 212 वें नंबर पर है। आजादी के बाद आईआईएम के साथ ही आईआईटी की परिकल्पना इस उम्मीद से की गई थी कि वह देश की बुनियाद को मजबूती देंगे। वाकई आईआईटी आज भी लाखों युवाओं का सपना है, लेकिन यदि उसकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह सपना टूट जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed