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मौत देने वाले डॉक्टर
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 11 Nov 2014 11:20 PM IST
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पंडारी गांव में नसंबदी के बाद नौ महिलाओं की मौत हो जाने की घटना चिकित्सकीय के साथ ही आपराधिक लापरवाही का भी नतीजा है। ऐसा कैसे हो गया कि महज-पांच छह घंटे के भीतर एक डॉक्टर ने अपने सहयोगियों के साथ 83 महिलाओं की नसंबदी के ऑपरेशन को अंजाम दे दिया!
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यह भी हैरानी की बात है कि इन ऑपरेशनों को अंजाम देने वाले डॉक्टर को इसी वर्ष 26 जनवरी को नसबंदी के पचास हजार ऑपरेशन करने के लिए पुरस्कृत तक किया जा चुका है। जाहिर है, यह घटना उस एक डॉक्टर को ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करती है।
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इससे पहले इसी राज्य में एक नेत्र शिविर में ऑपरेशन में लापरवाही बरते जाने की वजह से करीब पचास लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। प्रदेश सरकार की एक लोकप्रिय चिकित्सा बीमा सेवा का लाभ उठाने की आड़ में यहां दो-तीन गांवों की ही दो सौ से अधिक महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए जाने का भी सनसनीखेज मामला तक सामने आ चुका है। छत्तीसगढ़ उन राज्यों में है, जहां चिकित्सा व्यवस्था का बुरा हाल है, बावजूद इसके कि चौदह वर्ष पूर्व नया राज्य बनने के बाद यहां कई नए मेडिकल कॉलेजों के साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तक की स्थापना हो चुकी है।
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निश्चय ही बढ़ती आबादी को रोकने के लिए परिवार नियोजन की जरूरत है, मगर इसके लिए नसंबदी ऑपरेशन से कहीं अधिक जरूरी जागरूकता फैलाने की है। मगर हमारे यहां जब भी किसी सरकारी लक्ष्य को पूरा करने की बात आती है, तो उसका सबसे पहला निशाना गरीब ही होते हैं। पंडारी में भी यह नसबंदी शिविर ऐसे ही किसी लक्ष्य को साधने के लिए आयोजित किया गया था, जिसकी वजह से इन गरीब महिलाओं की जान चली गई और अब भी कई की हालत गंभीर है।
भारत दुनिया का तीसरा ऐसा देश है, जहां महिलाओं की नसंबदी की दर सबसे अधिक है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि ऐसे ऑपरेशन बेहद खराब परिस्थितियों में किए जाते हैं, जिसमें इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है। पंडारी की घटना पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की उपकार्यकारी निदेशक कैट गिलमोर की टिप्पणी पर गौर किया जाना चाहिए, यदि चिकित्सकीय मानकों की अनदेखी की जाएगी, तो दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ेंगे।