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काले धन पर नामों का खुलासा

Mon, 27 Oct 2014 08:37 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 27 Oct 2014 08:37 PM IST
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Disclosing new names on black money

देश की सियासत में उबाल लाने वाले काले धन के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए सर्वोच्च अदालत के समक्ष कुछ नामों का खुलासा किया है। जो नाम सामने आए हैं, उनमें डाबर के प्रदीप बर्मन को छोड़ दिया जाए, तो राजकोट के आभूषणों के कारोबार से जुड़े पंकज चमनलाल लोढिया और गोवा की खनन कंपनी से जुड़े टिम्ब्लू कंपनी के निदेशकों के नाम अनजाने से हैं।

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इसके बावजूद यह एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर इसलिए क्योंकि लंबे समय से काले धन ने देश में एक समानांतर अर्थव्यवस्था कायम कर रखी है। 1990 के दशक में हवाला कांड के सामने आने के बाद से देश में काले धन का मुद्दा जब-तब उठता रहा है, मगर न तो आज तक इसकी ठीक से जांच हो सकी और न ही इसके पीछे के लोगों तक पहुंचा जा सका है।
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हाल के वर्षों में अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलनों से भी काले धन का मुद्दा गरमाया था। यही नहीं, आम आदमी पार्टी भी काले धन के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा को घेरती रही है, और अभी उसने मोदी सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाया है। जाहिर है, यह राजनीतिक रूप से बेहद गरम मुद्दा है, मगर जरूरत इसे सनसनीखेज तरीके से पेश करने के बजाय उस पूरे तंत्र को तोड़ने की है, जिसकी आड़ में काला धन फलता-फूलता है।
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ध्यान रहे, काला धन सिर्फ विदेशों में ही नहीं है, देश के भीतर भी कर चोरों ने काली कमाई के रास्ते निकाल रखे हैं। सरकार ने सर्वोच्च अदालत को सीलबंद लिफाफे में 136 और नाम भी सौंपे हैं, जिन्हें लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। कांग्रेस को लगता है कि मोदी सरकार बदले की भावना से काम कर सकती है, लेकिन यदि उसके नेताओं और यूपीए के मंत्रियों ने कुछ भी गलत नहीं किया है, तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं है।


और फिर यह नहीं भूलना चाहिए कि काले धन के मुद्दे पर यह तेजी सर्वोच्च अदालत के दखल के बाद आई है, जिसके निर्देश पर विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इससे पहले यूपीए सरकार ने भी इसी वर्ष अप्रैल में सर्वोच्च अदालत को कर चोरी के लिए पनाहगाह माने जाने वाले देशों में कथित तौर पर काला धन जमा करने वाले 18 लोगों के नाम सौंपे थे। काले धन के मुद्दे पर यह प्रगति ठीक है, लेकिन ऐसा भी न हो कि छोटी मछलियां तो पकड़ में आ जाएं और बड़ी मछलियां बच निकलें।

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