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धोनी की पारी
नई दिल्ली
Updated Tue, 30 Dec 2014 08:17 PM IST
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क्रिकेट की अनिश्चितताओं की तरह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा दौरे के ऐन बीच में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर सबको अचंभित कर दिया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के बयान पर गौर करें, तो धोनी विभिन्न तरह के क्रिकेट फॉर्मट में खेलने की वजह से तनाव महसूस कर रहे थे, लिहाजा उन्होंने टेस्ट से संन्यास लेने का फैसला लिया है।
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इसके बावजूद कुछ बातें हैं, जिनका खुलासा होना बाकी है। मसलन, ऐसी क्या हड़बड़ी हो गई कि धोनी नए वर्ष में होने वाले अंतिम टेस्ट मैच तक इंतजार भी नहीं कर सके? क्या उन्होंने यह फैसला खुद लिया या फिर उन्हें ऐसा करने के संकेत दिए गए? धोनी अभी 33 वर्ष के हैं और बढ़ती उम्र के साथ तो अमूमन क्रिकेटर एकदिवसीय जैसे छोटे फॉर्मेट वाले खेल से संन्यास लेते हैं, ताकि और टेस्ट क्रिकेट खेल सकें।
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इसके बावजूद यह कहना होगा कि रांची जैसे छोटे से शहर और बेहद मामूली पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनने तक का धोनी का सफर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी रहा है। वह उस वक्त टीम इंडिया से जुड़े थे, जब टीम में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों के साथ ही वीरेंद्र सहवाग जैसे समकालीनों की मौजूदगी थी। इसके बावजूद कम समय में ही धोनी ने न सिर्फ टीम में अपनी जगह बनाई, बल्कि जल्द ही चयनकर्ताओं का भरोसा भी हासिल किया।
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वास्तव में एकदिवसीय और ट्वंटी-20 में विश्व कप दिलाने जैसी उनकी चमकीली उपलब्धियों को टेस्ट मैचों में दिलाई गई सर्वाधिक जीतों के साथ जोड़कर देखें, तो धोनी की जोड़ का कोई दिखता नहीं है। बेशक, सौरव गांगुली ने भारतीय टीम में लड़ने का जज्बा पैदा किया, मगर यह धोनी थे, जिनकी अगुआई में भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की नंबर वन टेस्ट टीम बन सकी।
मगर क्रिकेट आंकड़ों का खेल है और पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि धोनी टीम में वह जज्बा पैदा नहीं कर पा रहे थे, जिससे जीत मिलती है। वैसे धोनी के व्यक्तिगत रिकॉर्ड में कई मील के पत्थर हैं, जिनमें किसी भी भारतीय कप्तान द्वारा बनाए गए सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड भी शामिल है। बहरहाल, विराट कोहली के रूप में टीम को धोनी का उत्तराधिकारी जरूर मिल गया है, मगर मैदान में उनकी कमी खलेगी।