फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Decline in oil price and increasing hope

गिरता तेल और बढ़ती उम्मीदें

Wed, 14 Jan 2015 07:58 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 14 Jan 2015 07:58 PM IST
विज्ञापन
Decline in oil price and increasing hope

घटती मांग और बढ़ती उपलब्धता के बीच कच्चे तेल के दाम पिछले करीब छह महीने में साठ फीसदी घटकर न सिर्फ 45 डॉलर रह गए हैं, बल्कि आगे इसमें और गिरावट के आसार ने दुनिया को हैरत और आशंका से भी भर दिया है। अमेरिका में शेल गैस का बढ़ता उत्पादन और यूरोप में सुस्ती की वजह से कच्चे तेल की घटती मांग उतनी आश्चर्यजनक नहीं है, जितना हैरतनाक इस बार तेल उत्पादक संगठन ओपेक का रक्षात्मक रवैया है।

विज्ञापन


यह भांप पाना कठिन है कि तेल उत्पादन में कटौती न करने के उसके फैसले के पीछे रूस और ईरान को सबक सिखाने की अमेरिकी मंशा काम कर रही है, या सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों द्वारा अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने की रणनीति। पर दुनिया के चौथे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश भारत में कच्चे तेल में आ रही गिरावट को वरदान माना जा रहा है। इस गिरावट का तात्कालिक लाभ जहां उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के घटे हुए मूल्य से मिल रहा है, वहीं इस दौरान उत्पाद शुल्क बढ़ाकर सरकार ने राजस्व के मोर्चे पर भी भरपाई की राह तलाश ली है। कच्चे तेल में नरमी से महंगाई दर आंकड़ों में घट गई है, जिस कारण ब्याज दर में कटौती अब एक ठोस संभावना है। आगामी बजट तक इसका फायदा घटे हुए तेल आयात बिल, केरोसिन और रसोई गैस की सब्सिडी में कमी तथा राजकोषीय घाटे में उल्लेखनीय कमी के रूप में तो दिखने लगेगा ही, सरकार पर कर राजस्व में बढ़ोतरी का दबाव भी अपेक्षाकृत कम होगा।
विज्ञापन


अलबत्ता भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था में तेल के घटते दाम दीर्घावधि में हमारी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर भी डाल सकते हैं। इस गिरावट ने विश्व बाजार में अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं, जिसका असर सरकारी तेल कंपनियों की सेहत के साथ-साथ शेयर बाजार पर दिखने भी लगा है। इससे हमारा निर्यात भी प्रभावित होगा और विदेशी निवेश भी। गौरतलब है कि छह साल पहले जब तेल के दाम नीचे आए थे, तब भारत भी उससे कमोबेश प्रभावित हुआ था। सुखद यही है कि इन आशंकाओं के बावजूद विश्व बैंक ने भारत के तेज आर्थिक विकास का दावा किया है। लिहाजा बेहतर यही होगा कि गिरते तेल मूल्यों का प्रतिकूल असर दिखने से पहले हमारे यहां ब्याज दर घटाए जाने से लेकर वे तमाम कदम उठाए जाएं, जिनसे अर्थव्यवस्था को गति मिले।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed