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क्रिकेट का भला होगा

Wed, 23 Apr 2014 07:34 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Wed, 23 Apr 2014 07:34 PM IST
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Cricket will benefited

आईपीएल के पिछले सत्र में हुई सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग की निर्णायक जांच के लिए न्यायमूर्ति मुद्गल कमेटी को सर्वोच्च न्यायालय से औपचारिक तौर पर हरी झंडी बेशक अभी नहीं मिली हो, पर अदालत के रुख से फिक्सिंग से जुड़ी पूरी सच्चाई सामने आने का भरोसा मजबूत जरूर हुआ है।

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अपनी सीमाओं के बावजूद इस कमेटी ने विगत फरवरी में आईपीएल से जुड़े गोरखधंधे को जिस तरह उजागर किया था, उसके बाद लाजिमी तो यही था कि बीसीसीआई अपना घर साफ करने की पहल करता। पर एन श्रीनिवासन के नेतृत्व वाले भारतीय क्रिकट कंट्रोल बोर्ड ने इसे दबाने में ही ज्यादा रुचि दिखाई। मुद्गल कमेटी की जांच को आगे बढ़ाने के लिए उसने जो तीन सदस्यीय पैनल गठित किया था, उससे करीब-करीब असहमति जताकर सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है कि लीपापोती की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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अब पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक अधिकारसंपन्न मुद्गल कमेटी जांच आगे बढ़ाएगी, तो आईपीएल की कारगुजारियों का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने आएगा, और कई बड़े खिलाड़ियों के चेहरे से नकाब भी उतरेंगे, पर इसकी गाज सबसे अधिक उन श्रीनिवासन पर गिरनी है, जो मुद्गल कमेटी को जांच से दूर रखने की हरसंभव कोशिश में अब विफल हो चुके हैं।
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दरअसल आगामी जून में श्रीनिवासन को आईसीसी के मुखिया का पद संभालना है, पर एक बार जांच शुरू हो जाने के बाद उनकी महत्वाकांक्षा पर अंकुश लग सकता है। विवादास्पद शख्सियत को आईसीसी विश्व क्रिकेट के शीर्ष पद पर शायद ही बिठाना चाहेगी। आगामी सितंबर में बीसीसीआई की एजीएम (सालाना आम बैठक) भी तय है, जिसमें श्रीनिवासन द्वारा लाए गए कई प्रस्तावों पर विचार होना है, और जिसके पीछे की मंशा बोर्ड में अपने लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बरकरार रखना है।


पर मानना मुश्किल है कि बदलते घटनाक्रम में श्रीनिवासन अपनी इस चाल में सफल होंगे। एक बार उनके खिलाफ ठोस सुबूत सामने आ गए, तो वे तमाम लोग भी उनके खिलाफ हो जाएंगे, जो अभी मजबूरी में उनके साथ हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि जल्दी ही हम उन श्रीनिवासन के कुटिल इरादों पर रोक लगते देखेंगे, जो विवादास्पद होने के बावजूद भारतीय क्रिकेट को डंके की चोट पर चला रहे हैं।

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