फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   credibility of cricket

क्रिकेट की साख

Tue, 14 Jul 2015 09:01 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 14 Jul 2015 09:01 PM IST
विज्ञापन
credibility of cricket

आईपीएल में सट्टेबाजी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी द्वारा दिए गए फैसले से क्रिकेट की आड़ में चल रहे गोरखधंधे और लंबे समय से जारी हितों के टकराव से जुड़ी आशंकाओं की ही पुष्टि हुई है। असल सवाल भद्रजनों का खेल समझे जाने वाले क्रिकेट की साख का है, जिसे बट्टा लगाने में इसके कर्ताधर्ताओं ने ही कोई कसर नहीं छोड़ी है।

विज्ञापन


इसमें सबसे ऊपर एन श्रीनिवासन का नाम रखा जा सकता है, जिनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा पर लोढ़ा कमेटी ने क्रिकेट की गतिविधियों में हिस्सा लेने पर आजीवन रोक लगा दी है। हैरानी की बात है कि श्रीनिवासन अपने दामाद को सजा सुनाए जाने और चेन्नई सुपर किंग्स पर दो वर्ष की रोक लगाने के बावजूद नैतिक जिम्मेदारी तक लेने को तैयार नहीं हैं। इसके पूर्व कमिश्नर और भारत में वांछित ललित मोदी को लेकर उठे हालिया सियासी तूफान से इतर सच यह है कि इस फैसले ने आईपीएल की परिकल्पना को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन


यह सिर्फ श्रीनिवासन और ललित मोदी की मित्रता से बदली प्रतिद्वंद्विता का नतीजा नहीं है, बल्कि लगता है कि आईपीएल को खड़ा ही इसलिए किया गया, ताकि खेल की आड़ में करोड़ों के वारे-न्यारे किए जा सकें। अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति ब्रिटिश नागरिक राज कुंद्रा जैसे लोगों की इस सट्टेबाजी के खेल में संलिप्तता यही बताती है कि इसके तार विदेश से भी जुड़े हुए हैं। महेंद्र सिंह धोनी का नाम सीधे तौर पर सामने भले नहीं आया है, लेकिन देश के इस सफलतम क्रिकेट कप्तान से इतिहास यह जरूर जानना चाहेगा कि वह उस समय क्यों चुप थे, जब क्रिकेट की साख दांव पर लग गई थी! धोनी सीएसके के कप्तान ही नहीं हैं, बल्कि श्रीनिवासन की सीमेंट कंपनी के बड़े अधिकारी भी हैं, जिससे मयप्पन भी जुड़े हुए हैं। क्या इसे हितों का टकराव नहीं माना जाना चाहिए?
विज्ञापन
विज्ञापन


जस्टिस मुद्गल की रिपोर्ट और जस्टिस लोढ़ा कमेटी के फैसले से यह उम्मीद बंधी है कि सिर्फ छोटे क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि सट्टेबाजी में लिप्त बड़े लोग भी बख्शे नहीं जाएंगे। अब समय आ गया है, जब आईपीएल सहित भारतीय क्रिकेट की सफाई के बारे में ठोस तरीके से पहल की जाए। पर पहला सवाल यही है कि क्या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड श्रीनिवासन की छाया से बाहर निकल पाएगा?

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed