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हत्या कर कोंट के बिटोड़े में जलाया था नरेंद्र का शव
रोहतक
Updated Sat, 10 May 2014 02:33 AM IST
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भाली निवासी नरेंद्र का अपहरण किए जाने के मामले का शुक्रवार को खुलासा हो गया है। अपहरण वाले दिन ही नरेंद्र की हत्या कर दी गई थी तथा सुबूत खत्म करने के लिए उसका शव भी जला दिया गया था। जसराणा निवासी सुधीर ऊर्फ जस्सु व कोंट निवासी दीपक ने उसकी हत्या की दी थी।
हत्या के पीछे रुपये का लेन देन रहा है। पुलिस ने इस मामले में मोहन व दीपक को गुरुवार को गिरफ्तार किया है। इनको अदालत से चार दिन के रिमांड पर लिया गया था, जिसमें से अभी तीन दिन बाकी हैं। वहीं 30 अप्रैल को दर्शन व गौरव को गिरफ्तार किया गया था। इस पूरे मामले का मास्टर माइंड मोहन है।
गांव भाली आनंदपुर निवासी नरेंद्र 24 फरवरी को दीपक से मिलने के लिए रोहतक आया था। रोहतक में दो-तीन जगह जाने के बाद नरेंद्र दीपक को छोड़ने के लिए सेक्टर 4 तक चला गया। वहां पर पहले से ही सुधीर ऊर्फ जस्सु खड़ा हुआ था। दीपक ने नरेंद्र से कुछ देर रूकने के लिए कहा। उसके बाद सुधीर कोल्ड ड्रिंक ले आया।
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तीनों ने सेक्टर 4 में एक दुकान के सामने कोल्ड ड्रिंक पी। उसके बाद उन्होंने नरेंद्र को कहा कि उन दोनों को सेक्टर 4 में एक जानकार के घर छोड़ आए। दीपक गाड़ी चलाने लगा तथा नरेंद्र कंडक्टर की सीट पर बैठ गया। जस्सु पीछे बैठा हुआ था।
जैसे ही सेक्टर 4 के अंदर जाने लगा तो थोड़ी सुनसान जगह देखकर जस्सु ने तार से नरेंद्र का गला दबा दिया। जब नरेंद्र छुड़ाने का प्रयास करने लगा तो गाड़ी चला रहे दीपक ने उसके हाथ पकड़ लिए। इससे उसकी मौत हो गई। उसके बाद वे नरेंद्र की शव को उसी की स्विफ्ट गाड़ी की डिग्गी में डालकर मोहन के घर ले गए।
मोहन ने नरेंद्र के शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए दीपक व जस्सु की ही जिम्मेवारी लगा दी। इसके लिए उसने दोनों को एक जरीकन पैट्रोल उपलब्ध कराया तथा कहीं पर शव जला देने के लिए कहा। दीपक व जस्सु नरेंद्र के शव को लेकर रात लगभग 12 बजे गांव कोंट पहुंचे।
वहां पर एक बिटोड़े में नरेंद्र के शव को दबा दिया गया तथा पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। बिटोड़े में शव पूरी तरह जलकर राख हो गया। बिटोड़े में शव जलाए जाने के कारण वहां से बदबू आ रही थी। लोगों ने सुबह इसके बारे में झज्जर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव के की हड्डियों को जांच के लिए कब्जे में ले लिया था।
डीएसपी शमशेर सिंह दहिया ने बताया कि बिटोड़े पूरी तरह जलने से पहले आग बुझ गई। फिर से आग जलाने के लिए जब जस्सु ने आग में पैट्रोल फेंका तो एक दम आग भड़क गई तथा इस घटना में जस्सु के दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गए थे।
इस पर दीपक ने उसे सांपला के बालाजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। वहां पर जस्सु का नाम जग्गी लिखवाया गया था। सुबह जस्सु को पीजीआई में भर्ती कराया गया। पीजीआई में उसका नाम सतीश लिखवाया गया। नरेंद्र की स्विफ्ट डिजायर गाड़ी मोहन ने अपने साले गौरव व मामा दर्शन को बेचने के लिए दे दी थी।
इसके लिए उन्होंने गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट भी लगवा दी थी। मगर 31 अप्रैल को यमुनानगर जाते समय गौरव व दिनेश को सीआईए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गाड़ी की जांच की गई तो उसका चेसिस नंबर नरेंद्र की गाड़ी वाला ही था, जबकि गाड़ी का नंबर फर्जी लगाया हुआ था।
24 फरवरी को नरेंद्र की हत्या करने के बाद 3 मार्च को मोहन ने अपने साथी दीपक व जोेगेंद्र के साथ मिलकर राजस्थान निवासी हरिराम का अपहरण कर लिया था तथा उसे हरियाणा ले आए थे। इस मामले में उसके खिलाफ राजस्थान पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
30 मार्च को हिसार सीआईए पुलिस ने इन तीनों को अपहृत व्यक्ति के साथ हिसार से गिरफ्तार कर लिया था, साथ ही आधा किलो अफीम भी बरामद की थी। इस मामले में अग्रोहा थाने में मुकदमा भी दर्ज है। इसके बाद सीआईए पुलिस ने अपहरण के मामले मेें तीनों को राजस्थान पुलिस को सौंप दिया था। तब से तीनों जोधपुर जेल में बंद थे।
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हत्या के पीछे रुपये का लेन देन रहा है। पुलिस ने इस मामले में मोहन व दीपक को गुरुवार को गिरफ्तार किया है। इनको अदालत से चार दिन के रिमांड पर लिया गया था, जिसमें से अभी तीन दिन बाकी हैं। वहीं 30 अप्रैल को दर्शन व गौरव को गिरफ्तार किया गया था। इस पूरे मामले का मास्टर माइंड मोहन है।
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गांव भाली आनंदपुर निवासी नरेंद्र 24 फरवरी को दीपक से मिलने के लिए रोहतक आया था। रोहतक में दो-तीन जगह जाने के बाद नरेंद्र दीपक को छोड़ने के लिए सेक्टर 4 तक चला गया। वहां पर पहले से ही सुधीर ऊर्फ जस्सु खड़ा हुआ था। दीपक ने नरेंद्र से कुछ देर रूकने के लिए कहा। उसके बाद सुधीर कोल्ड ड्रिंक ले आया।
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तीनों ने सेक्टर 4 में एक दुकान के सामने कोल्ड ड्रिंक पी। उसके बाद उन्होंने नरेंद्र को कहा कि उन दोनों को सेक्टर 4 में एक जानकार के घर छोड़ आए। दीपक गाड़ी चलाने लगा तथा नरेंद्र कंडक्टर की सीट पर बैठ गया। जस्सु पीछे बैठा हुआ था।
जैसे ही सेक्टर 4 के अंदर जाने लगा तो थोड़ी सुनसान जगह देखकर जस्सु ने तार से नरेंद्र का गला दबा दिया। जब नरेंद्र छुड़ाने का प्रयास करने लगा तो गाड़ी चला रहे दीपक ने उसके हाथ पकड़ लिए। इससे उसकी मौत हो गई। उसके बाद वे नरेंद्र की शव को उसी की स्विफ्ट गाड़ी की डिग्गी में डालकर मोहन के घर ले गए।
मोहन ने नरेंद्र के शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए दीपक व जस्सु की ही जिम्मेवारी लगा दी। इसके लिए उसने दोनों को एक जरीकन पैट्रोल उपलब्ध कराया तथा कहीं पर शव जला देने के लिए कहा। दीपक व जस्सु नरेंद्र के शव को लेकर रात लगभग 12 बजे गांव कोंट पहुंचे।
वहां पर एक बिटोड़े में नरेंद्र के शव को दबा दिया गया तथा पैट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। बिटोड़े में शव पूरी तरह जलकर राख हो गया। बिटोड़े में शव जलाए जाने के कारण वहां से बदबू आ रही थी। लोगों ने सुबह इसके बारे में झज्जर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव के की हड्डियों को जांच के लिए कब्जे में ले लिया था।
डीएसपी शमशेर सिंह दहिया ने बताया कि बिटोड़े पूरी तरह जलने से पहले आग बुझ गई। फिर से आग जलाने के लिए जब जस्सु ने आग में पैट्रोल फेंका तो एक दम आग भड़क गई तथा इस घटना में जस्सु के दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गए थे।
इस पर दीपक ने उसे सांपला के बालाजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। वहां पर जस्सु का नाम जग्गी लिखवाया गया था। सुबह जस्सु को पीजीआई में भर्ती कराया गया। पीजीआई में उसका नाम सतीश लिखवाया गया। नरेंद्र की स्विफ्ट डिजायर गाड़ी मोहन ने अपने साले गौरव व मामा दर्शन को बेचने के लिए दे दी थी।
इसके लिए उन्होंने गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट भी लगवा दी थी। मगर 31 अप्रैल को यमुनानगर जाते समय गौरव व दिनेश को सीआईए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गाड़ी की जांच की गई तो उसका चेसिस नंबर नरेंद्र की गाड़ी वाला ही था, जबकि गाड़ी का नंबर फर्जी लगाया हुआ था।
24 फरवरी को नरेंद्र की हत्या करने के बाद 3 मार्च को मोहन ने अपने साथी दीपक व जोेगेंद्र के साथ मिलकर राजस्थान निवासी हरिराम का अपहरण कर लिया था तथा उसे हरियाणा ले आए थे। इस मामले में उसके खिलाफ राजस्थान पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
30 मार्च को हिसार सीआईए पुलिस ने इन तीनों को अपहृत व्यक्ति के साथ हिसार से गिरफ्तार कर लिया था, साथ ही आधा किलो अफीम भी बरामद की थी। इस मामले में अग्रोहा थाने में मुकदमा भी दर्ज है। इसके बाद सीआईए पुलिस ने अपहरण के मामले मेें तीनों को राजस्थान पुलिस को सौंप दिया था। तब से तीनों जोधपुर जेल में बंद थे।