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सब्र का बांध

Tue, 06 Aug 2013 08:26 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 06 Aug 2013 08:26 PM IST
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concern about border security

जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से की गई भड़काने वाली कार्रवाई को लेकर सरकार ने जिस तरह का नरम रुख अख्तियार किया है, वह हैरान करने वाला है। हमारी सीमा के भीतर हुए इस हमले में पांच भारतीय जवान शहीद हुए हैं, और हमारी सरकार है कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने में हिचक रही है।

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इसमें संदेह नहीं कि पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और लश्करे ताइबा, तीनों लगातार नियंत्रण रेखा के पास अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने संसद को बताया है कि इस हमले को आतंकवादियों के एक समूह ने अंजाम दिया, जिसमें कुछ लोग पाकिस्तानी वर्दी में थे। इसका तो यही अर्थ निकलता है कि कदाचित वह नहीं मान रहे हैं कि इसमें पाकिस्तानी सेना सीधे संलिप्त थी।
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ऐसा पहली बार नहीं है, जब रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान की कार्रवाई को कमतर आंकने की कोशिश की। इससे पहले जब जनवरी में पाकिस्तानी सैनिकों ने दो भारतीय जवानों का सिर कलम कर दिया था, तब भी वह पड़ोसी देश को कड़ा संदेश देने में विफल रहे थे। ऐसा ही चीन के मामले में भी देखा जा चुका है कि किस तरह वह बार-बार हमारी सीमा में घुसने की कोशिश करता है, पर उसके खिलाफ भी सख्ती नहीं दिखाई जाती। पाकिस्तान का मामला तो इसलिए भी चिंता की बात है, क्योंकि उसने अब तक 26/11 के हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के संकेत नहीं दिए हैं, जबकि भारत की ओर से निरंतर संबंध सामान्य बनाने की कोशिश होती रही है।
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नवाज शरीफ द्वारा पाकिस्तान की कमान संभालने के बाद उम्मीद थी कि शायद स्थिति में कुछ सुधार हो, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि कुछ भी नहीं बदला है। बल्कि पाकिस्तान संघर्ष विराम समझौते का लगातार उल्लंघन कर रहा है। इस हमले के बाद यदि अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नवाज शरीफ से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो उसमें गलत क्या है? भूलना नहीं चाहिए कि दो दिन पहले ही अफगानिस्तान में भारत के वाणिज्य दूतावास के सामने भी हमला हुआ था। दरअसल अफ-पाक सीमा पर जिस तेजी से स्थितियां बदल रही हैं, उसमें हमें कहीं ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है।

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