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रिजर्व बैंक मेहरबान
नई दिल्ली
Updated Tue, 29 Sep 2015 08:08 PM IST
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रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने त्योहारों का मौसम शुरू होने से ठीक पहले नीतिगत दरों में पचास बेसिक प्वाइंट की कटौती कर बड़ी राहत दी है, जिससे पिछले कुछ दिनों से बाजार में छाई सुस्ती दूर होने की संभावना है। इस कटौती से जहां रिवर्स रेपो दर 5.75 फीसदी हो गई है, वहीं रेपो दर 6.75 फीसदी।
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पिछले एक वर्ष के दौरान देखा गया है कि रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती का सीधा लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच सका, क्योंकि बैंकों ने इसके अनुरूप अपनी ब्याज दरें नहीं घटाईं। इसके उलट इस बार एसबीआई और आंध्रा बैंक सहित कई सरकारी बैंकों ने तुरंत ही अपने आवास और वाहन कर्ज संबंधी ब्याज दरों में कटौती का ऐलान कर दिया है। उम्मीद करनी चाहिए कि निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक भी ऐसी ही राहत देंगे।
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रघुराम राजन के इस कदम को मुद्रास्फीति के नियंत्रण में होने की पुष्टि के तौर पर भी देखा जा रहा है। बल्कि उन्होंने तो यह उम्मीद भी जताई है कि महंगाई की दर अगले वर्ष जनवरी तक 5.8 फीसदी और फिर मार्च तक गिरकर 5.5 फीसदी के स्तर पर आ जाएगी। मोदी सरकार के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि कमजोर मानसून की वजह से बराबर यह अंदेशा बना हुआ है कि आने वाले समय में खाद्य पदार्थ संबंधी मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। आखिर अरहर दाल के दाम आज भी बहुत से लोगों की पहुंच से दूर हैं ही।
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इसके साथ ही राजन ने यह अनुमान भी जताया है कि अगले वर्ष विकास दर 7.6 फीसदी से मामूली गिरावट के साथ 7.4 फीसदी हो सकती है। राहत की बात यह है कि ऐसे समय में जब दुनियाभर के बाजारों में पिछले कुछ समय से मंदी देखी जा रही है, रिजर्व बैंक की कटौती के बाद भारतीय बाजार में तेजी आई है। रिजर्व बैंक के इस कदम से यह धारणा भी दूर हुई होगी कि सरकार को रघुराम राजन से सहयोग नहीं मिलता।
यह समझने की जरूरत है कि रिजर्व बैंक के पास जादू की छड़ी नहीं है, मगर वह उपलब्ध विकल्पों में ही बेहतर विकल्प तलाश सकता है। और जैसा कि राजन ने कहा है, वित्तीय बाजार की उथल पुथल से बचाव का अच्छा तरीका यह है कि अपनी नीतियां अच्छी रखी जाएं। रिजर्व बैंक ने तो अपना काम कर दिया है, वास्तव में गेंद अब सरकार के पाले में है कि वह इसका कैसा लाभ उठाती है।