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सिटीजन चार्टर की दिशा में

Fri, 08 Mar 2013 09:36 PM IST
Updated Fri, 08 Mar 2013 09:36 PM IST
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citizens charter in india

एक लोकतांत्रिक देश के नागरिकों को सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत दिए अपना कामकाज निपटाने के लिए अगर साढ़े छह दशक तक इंतजार करना पड़े, तो यह कोई गर्व करने वाली बात नहीं है! तिस पर जिस सिटीजन चार्टर विधेयक पर केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी को उपलब्धि बताया जा रहा है, वह यूपीए की मौलिक परिकल्पना नहीं, बल्कि अन्ना हजारे के उस जनांदोलन से उपजे दबाव का नतीजा है, जो राजकाज के हर मोर्चे पर शुचिता की मांग के साथ पैदा हुआ था।

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फिर भी देश के आम नागरिकों के हित में बनने जा रहे इस कानून का महत्व तो है ही, जिसके तहत कोई भी सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त गैरसरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ पाएगा। जिस देश में अपने ही दस्तावेज बनवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती हो, जहां सरकारी कर्मचारी खुलेआम अपनी जिम्मेदारियों से मुकरते हों, वहां ऐसे एक कानून की जरूरत तो आजादी के बाद से ही है।
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इसकी भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि राजनीतिक भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संवेदनहीनता के बीच हाल के वर्षों में कई ऐसे कानून बने या बनने की राह पर हैं, जो लोकतंत्र में रिश्वतखोरी को यथासंभव कम करने और हाशिये के लोगों को हर मोर्चे पर सुरक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता जगाते हैं, चाहे वह रोजगार गारंटी योजना हो, सूचना और शिक्षा के अधिकार हों, खाद्य सुरक्षा गारंटी विधेयक हो या मौजूदा सिटीजन चार्टर हो।
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सूचना के अधिकार कानून के साथ सिटीजन चार्टर भी अगर कानून की शक्ल ले लेता है, तो पारदर्शिता के पक्ष में यह एक बड़ा कदम होगा, बावजूद इसके कि भ्रष्टाचार के बड़े मामले इसके दायरे में नहीं आएंगे। हालांकि यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सूचना के अधिकार कानून जैसे अचूक हथियार को भोथरा करने की कोशिशें भी कुछ कम नहीं हुईं।

फिर जिन राज्यों में पहले से सिटीजन चार्टर कानून अस्तित्व में हैं, वहां केंद्र की इस पहलकदमी का जैसा विरोध हो रहा है, वह भी बताता है कि कामकाज में ईमानदारी और पारदर्शिता बरतने के बजाय सरकारों का लक्ष्य श्रेय लूटना ज्यादा है। जबकि केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर यह विधेयक न सिर्फ अन्ना आंदोलन के बाद तैयार की गई रूपरेखा के मुताबिक है, बल्कि इसके दायरे को और व्यापक किया गया है।


ऐसे में, यह सचमुच देखने लायक होगा कि सिटीजन चार्टर को कानून की शक्ल देने और उसे पूरे देश में जल्दी से जल्दी लागू करने में केंद्र सरकार कितनी सक्रियता दिखाती है।

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