{"_id":"2da9e74a8e82487cbd6f611cfc0af54a","slug":"child-death-doctor-beaten-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"लो मुझे गिरफ्तार कर लो, नहीं चाहते, हमारी बच्ची की तरह दूसरे भी मरें","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
लो मुझे गिरफ्तार कर लो, नहीं चाहते, हमारी बच्ची की तरह दूसरे भी मरें
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Fri, 26 Sep 2014 02:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लो मुझे गिरफ्तार कर लो, नहीं चाहते कि हमारी बेटी अंकिता की तरह और भी बेगुनाह दम तोड़ें।
डॉक्टरों के दबाव में पुलिस दिनरात फोन और छापेमारी कर रही है। यह कहना है अंकिता के पिता और उसके परिजनों का। पीजीआई में उपचार के दौरान दम तोड़ने वाली सोनीपत जिले की बच्ची के परिजनों ने उसके पिता आनंद को बृहस्पतिवार शाम को डीसी कैंप कार्यालय में पेश किया।
आनंद को थाना पीजीआई प्रभारी के हवाले कर दिया गया। शाम को ही अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में सुनारिया जेल भेज दिया।
इसलिए लिया पेश करने का फैसला
आनंद को पेश करने आए गांव समरगोपालपुर के पूर्व सरपंच एवं आनंद के नजदीकी रिश्तेदार रघुबीर सिंह ने साफ कहा कि पुलिस लगातार दिनरात उनके घर पर फोन कर रही है और छापेमारी कर रही है। पुलिस डॉक्टरों के दबाव में है और हम भी नहीं चाहते कि अंकिता की मौत के बाद कोई और मरीज की मौत हो। इसलिए हमने आज ही निर्णय ले लिया कि आनंद को डीसी के सामने पेश करेंगे। इस बारे में डीसी डॉ. अमित अग्रवाल से बात की थी। उन्होंने भी आश्वासन दिया है कि यदि निर्दोष हैं तो अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
निर्दोष होते हुए भी भेज दिया जेल
पूर्व सरपंच रघुबीर सिंह ने कहा कि अंकिता के मामा सुशील को भी पुलिस के हवाले हमने खुद किया था, न कि पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जब उसे डॉ. जसबीर के सामने पेश किया तो उसने साफ इनकार कर दिया कि वह आरोपी है ही नहीं। उसने मारपीट ही नहीं की है। इस पर भी पुलिस ने उसे दोषी मानते हुए अदालत में पेश किया और वह निर्दोष होते हुए भी जेल में बंद है। यह सीधे तौर पर पुलिस की लापरवाह पूर्ण कार्यप्रणाली का उदाहरण है।
विज्ञापन
ये कहना है पुलिस का
थाना पीजीआई प्रभारी एमआई खान का कहना है कि उन्हें पता चला है कि परिजनों की ओर से सुशील की जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई अदालत में होनी है। पुलिस के हिसाब से तो वह आरोपी ही है। वहीं आनंद को अदालत ने जेल भेज दिया है।
डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की
परिजनों ने कहा कि डॉक्टर की लापरवाही से उनकी बच्ची की मौत हुई है। हंगामे और मारपीट के समय तो आनंद दवाई लेने गया था। वह मारपीट में भी शामिल नहीं था। बल्कि चिकित्सक ने ही उनके साथ बदतमीजी की थी और उनकी लापरवाही से ही उनकी बच्ची की मौत हुई। उन्होंने इस संबंध में अगले ही दिन पुलिस को शिकायत की थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप लगाया कि पीजीआई थाना पुलिस जानबूझ कर उनकी अर्जी को दबाकर रखे हुए है।
तेरहवीं पर छोड़ देंगे कांग्रेस
पूर्व सरपंच रघुबीर सिंह ने कहा कि वे चुप रहने वाले नहीं हैं। मामले की ओपन इंक्वायरी की मांग कर रहे हैं। मांग करेंगे कि मामले में कमिशन नियुक्त किया जाए। वे एमसीआई में भी शिकायत करेंगे और पूछेंगे कि डॉक्टरों को जिंदगी लेने का हक किसने दिया। उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि डॉ. जसबीर के साथ झगड़ा साढ़े 10 बजे हुआ था, लेकिन एमएलआर 12 बजे के बाद कटा है। सवालिया निशान लगता है कि उसका एमएलआर जानबूझ कर गलत तरीके से मिलीभगत कर डॉक्टरों ने बनाया है। वे काफी लंबे समय से कांग्रेस में ही काम करते रहे, लेकिन उनके साथ हुए व्यवहार से वे दुखी हैं। रविवार को अंकिता की तेरहवीं है। उसके बाद वे कांग्रेस छोड़ देंगे।
विज्ञापन
डॉक्टरों के दबाव में पुलिस दिनरात फोन और छापेमारी कर रही है। यह कहना है अंकिता के पिता और उसके परिजनों का। पीजीआई में उपचार के दौरान दम तोड़ने वाली सोनीपत जिले की बच्ची के परिजनों ने उसके पिता आनंद को बृहस्पतिवार शाम को डीसी कैंप कार्यालय में पेश किया।
आनंद को थाना पीजीआई प्रभारी के हवाले कर दिया गया। शाम को ही अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में सुनारिया जेल भेज दिया।
इसलिए लिया पेश करने का फैसला
आनंद को पेश करने आए गांव समरगोपालपुर के पूर्व सरपंच एवं आनंद के नजदीकी रिश्तेदार रघुबीर सिंह ने साफ कहा कि पुलिस लगातार दिनरात उनके घर पर फोन कर रही है और छापेमारी कर रही है। पुलिस डॉक्टरों के दबाव में है और हम भी नहीं चाहते कि अंकिता की मौत के बाद कोई और मरीज की मौत हो। इसलिए हमने आज ही निर्णय ले लिया कि आनंद को डीसी के सामने पेश करेंगे। इस बारे में डीसी डॉ. अमित अग्रवाल से बात की थी। उन्होंने भी आश्वासन दिया है कि यदि निर्दोष हैं तो अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन
निर्दोष होते हुए भी भेज दिया जेल
पूर्व सरपंच रघुबीर सिंह ने कहा कि अंकिता के मामा सुशील को भी पुलिस के हवाले हमने खुद किया था, न कि पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जब उसे डॉ. जसबीर के सामने पेश किया तो उसने साफ इनकार कर दिया कि वह आरोपी है ही नहीं। उसने मारपीट ही नहीं की है। इस पर भी पुलिस ने उसे दोषी मानते हुए अदालत में पेश किया और वह निर्दोष होते हुए भी जेल में बंद है। यह सीधे तौर पर पुलिस की लापरवाह पूर्ण कार्यप्रणाली का उदाहरण है।
विज्ञापन
ये कहना है पुलिस का
थाना पीजीआई प्रभारी एमआई खान का कहना है कि उन्हें पता चला है कि परिजनों की ओर से सुशील की जमानत के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई अदालत में होनी है। पुलिस के हिसाब से तो वह आरोपी ही है। वहीं आनंद को अदालत ने जेल भेज दिया है।
डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की
परिजनों ने कहा कि डॉक्टर की लापरवाही से उनकी बच्ची की मौत हुई है। हंगामे और मारपीट के समय तो आनंद दवाई लेने गया था। वह मारपीट में भी शामिल नहीं था। बल्कि चिकित्सक ने ही उनके साथ बदतमीजी की थी और उनकी लापरवाही से ही उनकी बच्ची की मौत हुई। उन्होंने इस संबंध में अगले ही दिन पुलिस को शिकायत की थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप लगाया कि पीजीआई थाना पुलिस जानबूझ कर उनकी अर्जी को दबाकर रखे हुए है।
तेरहवीं पर छोड़ देंगे कांग्रेस
पूर्व सरपंच रघुबीर सिंह ने कहा कि वे चुप रहने वाले नहीं हैं। मामले की ओपन इंक्वायरी की मांग कर रहे हैं। मांग करेंगे कि मामले में कमिशन नियुक्त किया जाए। वे एमसीआई में भी शिकायत करेंगे और पूछेंगे कि डॉक्टरों को जिंदगी लेने का हक किसने दिया। उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि डॉ. जसबीर के साथ झगड़ा साढ़े 10 बजे हुआ था, लेकिन एमएलआर 12 बजे के बाद कटा है। सवालिया निशान लगता है कि उसका एमएलआर जानबूझ कर गलत तरीके से मिलीभगत कर डॉक्टरों ने बनाया है। वे काफी लंबे समय से कांग्रेस में ही काम करते रहे, लेकिन उनके साथ हुए व्यवहार से वे दुखी हैं। रविवार को अंकिता की तेरहवीं है। उसके बाद वे कांग्रेस छोड़ देंगे।