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एक डॉन का पकड़ा जाना

नई दिल्ली Updated Tue, 27 Oct 2015 08:14 PM IST
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अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की इंडोनेशिया में हुई गिरफ्तारी के समय और तरीके को लेकर भले ही सवाल उठ रहे हैं, लेकिन भारतीय जांच एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी तो है ही। राजन को उस वक्त इंडोनेशिया की पुलिस ने बाली में गिरफ्तार किया, जब वह ऑस्ट्रेलिया से वहां पहुंचा ही था। यानी इस ऑपरेशन को भारत, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया तीनों देशों की एजेंसियों ने मिलकर अंजाम दिया, इससे निश्चय ही दक्षिण पूर्व एशिया को अपनी शरणस्थली बनाने वाले अंडरवर्ल्ड गिरोहों को कड़ा संदेश जाएगा।
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हालांकि इंडोनेशिया के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि अस्तित्व में नहीं आ सकी है, इसके बावजूद उम्मीद है कि राजन को भारत लाने में कोई खास अड़चन नहीं आएगी। भारत में सर्वाधिक वांछित आतंकी सरगना दाऊद इब्राहिम के सहयोगी रहे छोटा राजन के कमजोर पड़ने की खबरें पिछले वर्षों में आई हैं। उसका अपना गिरोह तो बिखर ही गया था, डी कंपनी की ओर से भी उस पर एकाधिक हमले हुए थे, और उसके गंभीर रूप से बीमार होने की खबरें भी आई हैं। लिहाजा सवाल किया जा सकता है कि छोटा राजन की गिरफ्तारी से आखिर हासिल क्या होने वाला है? अतीत में जाएं, तो पता चलता है कि 1970 के दशक में सिनेमा के टिकटों की ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली जैसे गोरखधंधे से अपने काले करियर की शुरुआत करने वाले छोटा राजन के खिलाफ अकेले मुंबई में ही 65 से अधिक मामले हैं, जिनमें हत्या जैसे संगीन अपराध से जुड़े मामले भी हैं।


इन मामलों की जांच के लिए संभव है कि मुंबई पुलिस को कोई एसआईटी बनानी पड़े। मगर, राजन की गिरफ्तारी का दूसरा पहलू कहीं अधिक महत्वपूर्ण है और वह यह कि मार्च, 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के बाद अंडरवर्ल्ड का एक नया चेहरा सामने आया था, और इसके तार सीमा पार से संचालित होने वाली आतंकी गतिविधियों से जा जुड़े थे। इसके बाद छोटा राजन की भूमिका भी बदल गई, जब उसने दाऊद के कृत्यों को 'राष्ट्र विरोधी' करार दिया था! लिहाजा छोटा राजन वह कड़ी है, जहां से जांच एजेंसियां दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क तक पहुंचना चाहेंगी; इसमें उन्हें कितनी सफलता मिलेगी, कहना अभी मुश्किल है, लेकिन इससे पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाने में मदद जरूर मिलेगी।
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