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चुप क्यों है सरकार

Sun, 14 Jun 2015 08:09 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 14 Jun 2015 08:09 PM IST
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Why is the government silent

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाने की घटना जितनी नृशंस थी; जिससे अंततः उनकी मृत्यु हो गई, उस घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई न होना उससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और कानून-व्यवस्था का मखौल उड़ाने जैसा है।

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हैरत इस बात पर भी है कि जगेंद्र सिंह ने मृत्यु पूर्व अपने बयान में जो कहा, उस आधार पर भी आरोपी को शिकंजे में कसने की कोई कोशिश नहीं हुई। अब तक कार्रवाई के नाम पर दोषी पुलिसवालों को सस्पेंड करने और मुख्य आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने से अधिक कुछ नहीं हुआ है। जबकि यह मामला सामने आने के तुरंत बाद राज्यमंत्री को पद से हटा देना चाहिए था। पर यदि मीडिया सक्रिय न होता और राज्यपाल ने दबाव न बनाया होता, तब कार्रवाई के नाम पर शायद इतना भी नहीं होता।
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पूरी सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आएगी, पर यह समझना मुश्किल नहीं कि राज्यमंत्री के कथित भ्रष्टाचार की फेसबुक पर पोल खोलने की वजह से ही पत्रकार की जान गई है। इस घटना के बाद बहराइच में भी एक मामला सामने आया है, जहां भ्रष्ट ग्राम प्रधान की असलियत बताने की कीमत एक आरटीआई कार्यकर्ता को जान देकर चुकानी पड़ी है। साफ है कि अखिलेश सरकार के कार्यकाल में सपा नेता और कार्यकर्ता इतने दुस्साहसी हो गए हैं कि वे अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों की हत्या करने तक से नहीं हिचक रहे।
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मुलायम सिंह ने एकाधिक अवसरों पर उच्छृंखल पार्टीजनों को चेतावनी दी है, पर लगता नहीं है कि उसका कोई असर पड़ा है। शाहजहांपुर वाले मामले में अखिलेश सरकार से त्वरित निर्णय लेने की अपेक्षा थी, पर कहते हैं कि आरोपी मंत्री के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार में एकमत न होने के कारण कोई कदम नहीं उठाया गया।


यदि सरकार की चुप्पी के पीछे जातिगत गुणा-भाग का समीकरण भी काम कर रहा है, तो फिर कहने के लिए रह क्या जाता है! पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता की हत्याएं जहां पारदर्शिता की बात करने वाली अखिलेश सरकार की छवि पर धब्बा है, वहीं पार्टीजनों का बढ़ता दुस्साहस उसकी नाकामी का परिचायक भी। अब यदि अदालत के निर्देश से आरोपी मंत्री के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो इस सरकार की और किरकिरी होनी तय है।

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