{"_id":"14ecd1a8cecf244fff2a14c4abd5b121","slug":"busenessman-son-srinagar-flood-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यवसायी का बेटा श्रीनगर में फंसा","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
व्यवसायी का बेटा श्रीनगर में फंसा
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Fri, 12 Sep 2014 02:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘पापा! मुझे यहां से ले जाओ। खाना मिल रहा है न पानी। चारो ओर पानी ही पानी भरा है। अभी तक राहत टीम भी नहीं पहुंची है। हॉस्टल में पानी भर गया है।
1500 छात्र और कॉलेज स्टाफ बुरी तरह फंसा है। खुले मैदान में बैठे हैं और हर पल आस टूटती जा रही है। गोहाना अड्डा निवासी मोबाइल व्यवसायी अशोक कुमार का 19 साल का बेटा अनमोल घाटी में कुदरत के कहर में फंस गया है। वह श्रीनगर के हजरतबल स्थित एनआईटी में बीटेक सेकंड ईयर का छात्र है।
पूरा परिवार दिन-रात केवल इस इंतजार में जाग रहा है कि कब बेटे का फोन आ जाए और उसकी आवाज सुनने को मिल जाए। बेटे को सुरक्षित वापस लाने के लिए अशोक कुमार शुक्रवार को डीसी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल से मुलाकात करेंगे।
एक माह पहले ही गया था कॉलेज
अशोक कुमार ने बताया कि उनका बेटा एक माह पहले ही कॉलेज में गया था। वहां जब बारिश शुरू हुई तो उसे वापस आने को कहा। लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने निकलने नहीं दिया।
विज्ञापन
बताया गया कि प्रबंधन ने उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया है। अनमोल की मां आशा, बहन मान्या, दादा मोहन लाल और दादी राजरानी, चाचा और चाची उपासना का बुरा हाल है। कई दिनों से सोए नहीं हैं। वहां से फोन आता है तो केवल हैलो हैलो की आवाज आने के बाद कट जाता है। फोन की घंटी बजते ही सभी चौकन्ने हो जाते हैं और फोन उठाने के लिए भागते हैं कि शायद अनमोल का ही फोन है। पड़ोसी और रिश्तेदार भी परिवार को हिम्मत दिलाने पहुंच रहे हैं।
रात साढ़े तीन बजे हुई बात
नम आंखों से मां आशा ने बताया कि बुधवार रात साढ़े तीन बजे अनमोल का फोन आया था। उससे बस चंद सेकेंड ही बात हो पाई और फोन कट गया। अनमोल ने बताया कि उन्हें तीन दिन पहले हॉस्टल में पानी भरने के बाद बाहर निकाल दिया गया था। हालात ये हैं कि चारों ओर पानी ही पानी है, लेकिन पीने का पानी नहीं है। अशोक कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार रात 9 बजे भी अनमोल का फोन आया है। 2 मिनट बात हुई। वहां सहायता नहीं पहुंच पा रही है। उसने बताया है कि दोपहर में वे लेह के रास्ते निकलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने मना कर दिया। शुक्रवार को वे प्रयास करेंगे कि लेह तक पहुंच जाएं और वहां से फ्लाइट पकड़ लें। कालेज ने डेढ़ माह की छुट्टी कर दी है।
कालेज प्रबंधन की ओर से मिल रही है सहायता
अनमोल के पिता ने बताया कि कालेज प्रबंधन की ओर छात्रों को काफी सुविधा दी जा रही है। लेकिन, प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं पहुंच पा रही है। वहां, एक एयरफोर्स अधिकारी विंग कमांडर यादव से बात हुई थी। उन्होंने भी मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है। जो मदद सेना और वायुसेना कर रही है, कोई नहीं कर रहा। वहां के स्थानीय विधायक से भी बात करने का प्रयास किया है, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
...और भर आई दादी की आंखें
दादी राजरानी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही है। पोते को सुरक्षित वापस लाने की बात कहते कहते रोने लगती हैं। कहा कि उनका पोता अनमोल पढ़ाई में बहुत होशियार है। मैंने कहा था कि बारिश ज्यादा हो रही है, घर वापस आजा। उससे बात भी नहीं हो रही। पता नहीं मेरा बच्चा किस हाल में होगा?
विज्ञापन
1500 छात्र और कॉलेज स्टाफ बुरी तरह फंसा है। खुले मैदान में बैठे हैं और हर पल आस टूटती जा रही है। गोहाना अड्डा निवासी मोबाइल व्यवसायी अशोक कुमार का 19 साल का बेटा अनमोल घाटी में कुदरत के कहर में फंस गया है। वह श्रीनगर के हजरतबल स्थित एनआईटी में बीटेक सेकंड ईयर का छात्र है।
पूरा परिवार दिन-रात केवल इस इंतजार में जाग रहा है कि कब बेटे का फोन आ जाए और उसकी आवाज सुनने को मिल जाए। बेटे को सुरक्षित वापस लाने के लिए अशोक कुमार शुक्रवार को डीसी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल से मुलाकात करेंगे।
विज्ञापन
एक माह पहले ही गया था कॉलेज
अशोक कुमार ने बताया कि उनका बेटा एक माह पहले ही कॉलेज में गया था। वहां जब बारिश शुरू हुई तो उसे वापस आने को कहा। लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने निकलने नहीं दिया।
विज्ञापन
बताया गया कि प्रबंधन ने उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया है। अनमोल की मां आशा, बहन मान्या, दादा मोहन लाल और दादी राजरानी, चाचा और चाची उपासना का बुरा हाल है। कई दिनों से सोए नहीं हैं। वहां से फोन आता है तो केवल हैलो हैलो की आवाज आने के बाद कट जाता है। फोन की घंटी बजते ही सभी चौकन्ने हो जाते हैं और फोन उठाने के लिए भागते हैं कि शायद अनमोल का ही फोन है। पड़ोसी और रिश्तेदार भी परिवार को हिम्मत दिलाने पहुंच रहे हैं।
रात साढ़े तीन बजे हुई बात
नम आंखों से मां आशा ने बताया कि बुधवार रात साढ़े तीन बजे अनमोल का फोन आया था। उससे बस चंद सेकेंड ही बात हो पाई और फोन कट गया। अनमोल ने बताया कि उन्हें तीन दिन पहले हॉस्टल में पानी भरने के बाद बाहर निकाल दिया गया था। हालात ये हैं कि चारों ओर पानी ही पानी है, लेकिन पीने का पानी नहीं है। अशोक कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार रात 9 बजे भी अनमोल का फोन आया है। 2 मिनट बात हुई। वहां सहायता नहीं पहुंच पा रही है। उसने बताया है कि दोपहर में वे लेह के रास्ते निकलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने मना कर दिया। शुक्रवार को वे प्रयास करेंगे कि लेह तक पहुंच जाएं और वहां से फ्लाइट पकड़ लें। कालेज ने डेढ़ माह की छुट्टी कर दी है।
कालेज प्रबंधन की ओर से मिल रही है सहायता
अनमोल के पिता ने बताया कि कालेज प्रबंधन की ओर छात्रों को काफी सुविधा दी जा रही है। लेकिन, प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं पहुंच पा रही है। वहां, एक एयरफोर्स अधिकारी विंग कमांडर यादव से बात हुई थी। उन्होंने भी मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है। जो मदद सेना और वायुसेना कर रही है, कोई नहीं कर रहा। वहां के स्थानीय विधायक से भी बात करने का प्रयास किया है, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
...और भर आई दादी की आंखें
दादी राजरानी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही है। पोते को सुरक्षित वापस लाने की बात कहते कहते रोने लगती हैं। कहा कि उनका पोता अनमोल पढ़ाई में बहुत होशियार है। मैंने कहा था कि बारिश ज्यादा हो रही है, घर वापस आजा। उससे बात भी नहीं हो रही। पता नहीं मेरा बच्चा किस हाल में होगा?