{"_id":"f394e955bb3535313141766bb340fb4c","slug":"bjp-in-new-age-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा का नया दौर","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
भाजपा का नया दौर
नई दिल्ली
Updated Sun, 10 Aug 2014 07:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव में विराट जीत के बाद भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की यह बैठक दरअसल उन अमित शाह की ताजपोशी का अवसर थी, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में भारी उलटफेर के जरिये पार्टी की अभूतपूर्व विजय की पटकथा लिखी। खुद भाजपा के नए अध्यक्ष के लिए भी यह राष्ट्रीय राजनीति में अपने को स्थापित-साबित करने का पहला मौका था, और इस मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।
विज्ञापन
गर्व और आत्मविश्वास से चमकती यह भाजपा अटल-आडवाणी युग से अब मोदी-शाह के नए दौर में प्रवेश कर रही है, जिसकी झलक पोस्टरों से लेकर बैठक तक में दिखाई पड़ी। मोदी, शाह और राजनाथ की त्रयी इस बैठक में जितनी मजबूत होकर उभरती दिखी, आडवाणी की उपेक्षा यहां उतनी ही स्पष्ट थी। चूंकि भाजपा को शानदार जीत मिली है, इसलिए उसका गर्वित होना तो समझ में आता है, जो बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं के बढ़े हुए आत्मविश्वास में भी दिखता था। पर अब भाजपा को अपनी उपलब्धियों का बखान करने से आगे बढ़ते हुए गंभीर कामकाज में जुटना होगा।
विज्ञापन
नए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के सामने फिलहाल चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने की परीक्षा है। इनमें से महाराष्ट्र को छोड़कर शेष राज्यों में चुनावी जंग इतनी भी आसान नहीं है। यह ठीक है कि हरियाणा में कांग्रेस के लिए स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है, पर वहां विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने की संभावना जताकर अमित शाह ने राज्य भाजपा पर बोझ बढ़ा दिया है। सिर्फ यही नहीं कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन अमित शाह का कद तय करेगा, बल्कि उनकी जिम्मेदारी आने वाले दिनों में पार्टी को नए इलाकों में ले जाने की भी होगी।
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बीच के तालमेल को देखते हुए इसमें तो कोई संदेह ही नहीं है कि सरकार और पार्टी के बीच बेहतर समझदारी बनेगी, पर बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका प्रभाव भाजपा के नए इलाकों में काबिज होने और सरकार द्वारा मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में दिखाई पड़ेगा। उसे समझ लेना चाहिए कि उसका काम सिर्फ विपक्षी पार्टियों की आलोचना करना और तमाम गलतियों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना नहीं है, बल्कि बेहतर कामकाज के जरिये खुद को दूसरे से अलग दिखाना है।