फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Biohacking: Technology and The Next Stage of Human Evolution

फोन हाथ में लेते ही हैक कर लेता है शख्स, जानिए कैसे है संभव

Sat, 04 Jul 2015 09:27 AM IST
Updated Sat, 04 Jul 2015 09:27 AM IST
विज्ञापन
Biohacking: Technology and The Next Stage of Human Evolution

यदि आप सेथ व्हाल के हाथ में अपना मोबाइल दें, तो वो क्षण भर में अपकी तस्वीरें, फ़ोटो, पासवर्ड चोरी कर लेते हैं। लेकिन ये कैसे संभव है?

विज्ञापन


सेथ व्हाल उन लोगों में से हैं जिनके शरीर में चिप लगा हुआ। व्हाल अमरीकी नेवी के पूर्व अधिकारी हैं। लेकिन अब वे एपीए वायरलेस कंपनी के साथ इंजीनियर हैं और उनका काम बायो-हैंकिंग है।
विज्ञापन


व्हाल की बात आगे बढ़ाने से पहले एक सवाल। क्या आपको पिछले दिनों आई फ़िल्म पीके याद है? इसमें एलियन का रोल कर रहे आमिर किसी लड़की का हाथ पकड़कर उसके मन की सारी बातें, भाषा-बोली, दिमाग में मौजूद हर बात जान लेते हैं ! ये भी कुछ ऐसा ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


व्हाल अब साइबर सिक्योरिटी पर काम कर रहे हैं। वो अपने साथी रॉड सोटो के साथ दिखाते हैं कि केवल टच करते ही वे फ़ोन को हैक कर सकते हैं।

ये दोनों अपने चिप का इस्तेमाल किसी आपराधिक काम के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं।

उनका मक़सद ये बताया है कि किस तरह से आने वाले दिनों में हमारे फोन और कंप्यूटर की जानकारी आसानी से हैक होगी और हमें इसका एहसास तक नहीं होगा।

हैकमियामी में प्रदर्शन

Biohacking: Technology and The Next Stage of Human Evolution

इसकी शुरुआत हुई जब सिक्यूरिटी रिसर्चर और इवेंट हैकमियामी के दौरान व्हाल आयोजक सोटो के साथ पिज्जा खा रहे थे। सोटो ने बताया, "सेथ उस वक्त पिज्जा खा रहे थे। मैंने उनसे ऐसे ही कहा कि आप कंप्यूटर पसंद करने वाले दिखते हो, और पाया कि उनके हाथ में तो चिप लगा हुआ है।"

सेथ व्हाल के हाथ में आरएफआईडी चिप लगा हुआ है, जो अपने पास आने वाले उपकरणों से डाटा हैक कर सकता है। सोटो मुख्य तौर पर सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर हैकिंग से जुड़े हैं। उन्होंने व्हाल को 2014 में हैकमियामी में अपनी प्रिजेंटेशन देने को कहा।

दोनों ने तय किया कि किसी मैलवेयर यानी वायरस वाले सॉफ़्टवेयर को वो किसी मोबाइल में भेजने का प्रयोग करेंगे।

कुछ महीनों के अंदर दोनों ने मिलकर पूरी व्यवस्था डिज़ाइन कर ली और जैसे ही किसी का फ़ोन व्हाल के हाथ में दिया गया, उन्होंने वायरस वाला सॉफ़्टवेयर उसमें आसानी से भेज दिया।

व्हाल ने बताया, "अमूमन ऐसी चीजें पहली बार कामयाब नहीं होतीं।" इनका हैकिंग सिस्टम कुछ इस तरह से काम करता है- व्हाल के हाथ में लगे आरएफआईडी चिप में एक नियर फ़ील्ड कम्यूनिकेशन (एनएफसी) एंटीना लगा होता है, जिससे निकलनी वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी एनएफसी एनेब्लड डिवाइस जैसे मोबाइल से बात कर सकती हैं।

एनएफसी डिवाइस पर कमाल

Biohacking: Technology and The Next Stage of Human Evolution

ऐसे में जब व्हाल के हाथ में किसी का फोन आता है तो उनका चिप डिवाइस को एक संकेत देता है। अगर फोन इस्तेमाल करने वाला हां करता है तो, तो फोन एक दूर स्थित सर्वर से कनेक्ट हो जाता है। व्हाल बताते हैं, "यूज़र से संकेत मिलने पर वह फ़ोन जैसे मेरे काबू में आ जाता है।"

सोटो के मुताबिक व्हाल के हाथ में कुछ देर तक फोन रहने पर उसकी सारी फ़ाइल हम डाउनलोड कर सकते हैं। व्हाल और सोटो आपस में मिलकर डिवाइस को और ज़्यादा प्रभावी बनाने की कोशिशों में जुटे हैं ताकि डिवाइस में आने वाला पॉपअप किसी सिस्टम अपडेट जैसा लगे या फिर कैंडी क्रश नोटिफ़िकेशन जैसा। ऐसे फोन को हैक करना आसान हो जाता है।

दरअसल बायो-हैकिंग समुदाय, सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर हैकिंग समुदाय में अभी लिंक्डअप नहीं हैं। लेकिन हैकमियामी 2015 में कुछ ही बायो हैकर नज़र आए, जबकि सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर हैकिंग करने वाले सैकड़ों हैकर मौजूद थे।

हैकरों की अलग दुनिया

Biohacking: Technology and The Next Stage of Human Evolution

व्हाल कहते हैं, "निश्चित तौर पर दो दुनिया है। बायो-हैकर कोई नुकसान नहीं पहुंचाते, उनमें उतनी तकनीकी कुशलता भी नहीं होती। वहीं दूसरी ओर हैकिंग करने वाला समुदाय में काफी प्रतिभाशाली लोग होते हैं। कुछ तो बहुत स्मार्ट लोग होते हैं, वे क्रेज़ी चीजें कर लेते हैं।"

हालांकि व्हाल और सोटो के प्रयोग एक तरह से शरीर के अंदर इम्पलांट करके हैकिंग करने की शुरुआत है। फोन के अलावा क्रेडिट कार्ड सिस्टम, मोबाइल पेमेंट्स, एप्पल पे, गूगल वेलेट, कीकार्ड और मेडिकल डिवाइस के साथ भी यह संभव हो सकता है।

एनएफसी एनेब्लड कम्यूनिकेशन उपकरणों को चिप से हैक करने के लिए आपको बस उस डिवाइस के नजदीक पहुंचना होता है।

वैसे बायो-हैकिंग इतनी आसान भी नहीं है। हाथ में आरएफआईडी चिप को इमप्लांट कराना मुश्किल काम है। आप इसे झटके से नहीं करा सकते और हर दूसरा आदमी बायो हैकर भी नहीं होता।

व्हाल ने एक टैटू आर्टिस्ट से चिप अपने हाथ में इंप्लांट करवाया है। अंगूठे और उसकी बगल वाली अंगुली के बीच में।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed