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चुनौती बड़ी है

Sun, 05 Jan 2014 07:10 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 05 Jan 2014 07:10 PM IST
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big challanges are ahead

आम आदमी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने वैसे तो सभी राजनीतिक दलों की कठिनाइयां बढ़ा दी हैं, लेकिन कांग्रेस इस मामले में सबसे ज्यादा परेशान है, तो यह समझ में आता है। सिर्फ यही नहीं कि हाल के विधानसभा चुनावों में दो राज्यों में कांग्रेस की सत्ता गई, बल्कि पार्टी की जो छवि है, उसे देखते हुए आगामी लोकसभा चुनाव में उसकी संभावनाओं की जमीन निरंतर सिकुड़ती ही जा रही है।

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ऐसे में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चिंता स्वाभाविक है, जो इसी महीने औपचारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो सकते हैं! इसके ब्योरे हैं कि उनकी पहल पर भ्रष्टाचार उन्मूलन से संबंधित कुछ विधेयक पारित करने के लिए सरकार जल्दी ही संसद का एक छोटा सत्र बुला सकती है। इसका उद्देश्य लोकसभा चुनाव से पहले जनता को यह बताना होगा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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हवा यह भी है कि कांग्रेस के मौजूदा सांसदों में से आधे का टिकट काटा जा सकता है; आप की सफलता को देखकर कांगेस शहरी और अर्द्धशहरी इलाकों में गैरराजनीतिक और प्रोफेशनल, पर ईमानदार छवि के लोगों पर भरोसा कर सकती है। आम आदमी के अलावा बुद्धिजीवियों और उद्योगपतियों के आप के प्रति बढ़ते आकर्षण ने पार्टी को विचलित किया है। करने को कुछ भी किया जा सकता है, लेकिन सच्चाई यह है कि भ्रष्टाचार उन्मूलन के प्रति कांग्रेस का रवैया ढुलमुल ही है।
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राहुल गांधी के दबाव पर महाराष्ट्र सरकार ने आदर्श घोटाले की जांच रिपोर्ट पर अमल करना स्वीकार तो किया, लेकिन दंडित सिर्फ नौकरशाहों को किया जाएगा, दोषी राजनेताओं पर कार्रवाई नहीं होगी। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले आए हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व इस पर कुछ नहीं कह रहा।


घोटालों की सच्चाई सामने आने के बाद अगस्ता-वेस्टलैंड से हेलीकॉप्टर खरीद का सौदा रद्द कर दिया गया है। कर्नाटक में दो दागी विधायकों को मंत्री बनाने के फैसले का बचाव मुख्यमंत्री कर ही रहे हैं। क्या राहुल गांधी इन सभी मुद्दों पर प्रभावी पहल करेंगे? कांग्रेस अगर यह सोचती है कि इन सब पर चुप्पी साधते हुए भ्रष्टाचार-निरोधी कुछ विधेयक पारित कर वह जनता के बीच नायक बन जाएगी, तो उसका भ्रम ही है।

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