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पति के साथ चुनावी मैदान में भी आधी जिम्मेदारी निभा रहीं प्रत्याशियों की अर्धांगिनी
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Mon, 29 Sep 2014 02:23 AM IST
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विधानसभा चुनाव परवान चढ़ रहा है। मैदान और योद्धा दोनों तैयार हैं। जिले में प्रत्याशी 18-18 घंटे प्रचार कर रहे हैं।
सियासी दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रत्याशियों की जीवन संगिनी यहां भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रही हैं। कई घंटे डोर टू डोर प्रचार, जनसभाएं और चाय पार्टी के साथ पति की जीत के लिए मन्नत मांगना भी नहीं भूल रही हैं।
रसोई से लेकर चुनावी रण के प्रबंधन में कहीं भी पीछे नहीं हैं। बावजूद इसके चेहरे पर शिकन तक नहीं। थकान दूर करने के लिए पूजा-पाठ, योग और गपशप। घर पर पहुंच रहे कार्यकर्ताओं और मेहमानों को भी संभाल रही हैं। रविवार को छुट्टी के दिन अमर उजाला संवाददाता ने जानी सियासी घरानों की कहानी...
पहले बेटे तो अब पति के लिए 12 घंटे प्रचार
1952 से रोहतक की राजनीति के बारे में सुनती आ रही हूं। ब्याह के आई तो पति भूपेंद्र के साथ जन सेवा से जुड़ी। अब बच्चों की जिम्मेदारी से मुक्त हूं तो सारा समय जनसेवा को दे रही हूं। लोकसभा चुनाव में बेटे दीपेंद्र तो अब पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हूं। सुबह 7 बजे उठने के बाद हैवी डाइट लेती हूं और 9:30 बजे प्रचार पर निकल जाती हूं। फिर तो रात 10-11 बजे ही फुर्सत लगती है। थकान बिल्कुल नहीं होती। जनता मेरे बच्चों के समान है और बच्चों से मिलने में थकान कैसी? परमात्मा का ध्यान कर सोती हूं।
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-आशा हुड्डा, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पत्नी (कांग्रेस प्रत्याशी, हलका गढ़ी-सांपला-किलोई )
5 साल से घर पर डिनर नहीं किया विधायक ने
घुटनों में दर्द, सरवाइकल और ऑपरेशन के बाद अब डोर-टू-डोर प्रचार नहीं कर पा रही हूं। घर और कार्यालय से ही महिला कार्यकर्ताओं की कमान संभाल रही हूं। देवी शक्ति में बहुत विश्वास है, लेकिन स्वास्थ्य सही नहीं होने के कारण व्रत नहीं रख पाई। सुबह शाम मां के मंत्र का जाप करती हूं। विधायक जी तो सुबह 5 बजे ही निकल जाते हैं और रात 12 या 1 बजे तक व्यस्त रहते हैं। उनका परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल है। प्रचार के दौरान सुबह चाय या दूध ले लिया तो ठीक नहीं तो पूरा दिन बाहर ही प्रचार में जुटे रहते हैं। पिछले पांच साल में शायद ही कोई एक दिन ऐसा आया हो, जब रात के समय उन्होंने घर पर खाना खाया हो। जनता के प्रति इसी प्यार व ईमानदारी के कारण उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का खिताब मिला है। अब जनता के ईनाम देने की बारी है।
- नीलम बतरा, विधायक बी. बी. बतरा की धर्मपत्नी (कांग्रेस प्रत्याशी, रोहतक हलका)।
सास प्रचार तो बहू घर की संभाल रहीं कमान
अब तो सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाती हूं। फिर तो रात डेढ़ बजे ही सोना होता है। पूरा दिन कार्यकर्ताओं को संभालने, उनके खाने का प्रबंध देखने और डोर-टू-डोर प्रचार में बीतता है। 52 साल की उम्र में थकान तो होती ही है। बहू सौम्या ग्रोवर ने घर व रसोई की कमान संभाल रखी है, इससे राहत है। शाम 4 से 8 बजे तक टीम के साथ प्रचार पर निकलती हूं। मंदिर या गुरुद्वारा दिखे तो मत्था टेकना नहीं भूलती। नेताजी तो सुबह 6:15 बजे ही चाय पीकर प्रचार पर निकल जाते हैं। सुबह 10 बजे घर पर नाश्ते के बाद तो रात 11 या 12 बजे ही आना होता है। दो महीने से 24 घंटे रसोई चल रही है। भगवान ने सुनी तो उन्हें लेकर व्यास में गुरु के दर्शन करने जाऊंगी।
- वीना ग्रोवर, पत्नी, मनीष ग्रोवर (भाजपा प्रत्याशी, हलका रोहतक)।
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सियासी दिग्गजों ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रत्याशियों की जीवन संगिनी यहां भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रही हैं। कई घंटे डोर टू डोर प्रचार, जनसभाएं और चाय पार्टी के साथ पति की जीत के लिए मन्नत मांगना भी नहीं भूल रही हैं।
रसोई से लेकर चुनावी रण के प्रबंधन में कहीं भी पीछे नहीं हैं। बावजूद इसके चेहरे पर शिकन तक नहीं। थकान दूर करने के लिए पूजा-पाठ, योग और गपशप। घर पर पहुंच रहे कार्यकर्ताओं और मेहमानों को भी संभाल रही हैं। रविवार को छुट्टी के दिन अमर उजाला संवाददाता ने जानी सियासी घरानों की कहानी...
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पहले बेटे तो अब पति के लिए 12 घंटे प्रचार
1952 से रोहतक की राजनीति के बारे में सुनती आ रही हूं। ब्याह के आई तो पति भूपेंद्र के साथ जन सेवा से जुड़ी। अब बच्चों की जिम्मेदारी से मुक्त हूं तो सारा समय जनसेवा को दे रही हूं। लोकसभा चुनाव में बेटे दीपेंद्र तो अब पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हूं। सुबह 7 बजे उठने के बाद हैवी डाइट लेती हूं और 9:30 बजे प्रचार पर निकल जाती हूं। फिर तो रात 10-11 बजे ही फुर्सत लगती है। थकान बिल्कुल नहीं होती। जनता मेरे बच्चों के समान है और बच्चों से मिलने में थकान कैसी? परमात्मा का ध्यान कर सोती हूं।
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-आशा हुड्डा, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पत्नी (कांग्रेस प्रत्याशी, हलका गढ़ी-सांपला-किलोई )
5 साल से घर पर डिनर नहीं किया विधायक ने
घुटनों में दर्द, सरवाइकल और ऑपरेशन के बाद अब डोर-टू-डोर प्रचार नहीं कर पा रही हूं। घर और कार्यालय से ही महिला कार्यकर्ताओं की कमान संभाल रही हूं। देवी शक्ति में बहुत विश्वास है, लेकिन स्वास्थ्य सही नहीं होने के कारण व्रत नहीं रख पाई। सुबह शाम मां के मंत्र का जाप करती हूं। विधायक जी तो सुबह 5 बजे ही निकल जाते हैं और रात 12 या 1 बजे तक व्यस्त रहते हैं। उनका परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल है। प्रचार के दौरान सुबह चाय या दूध ले लिया तो ठीक नहीं तो पूरा दिन बाहर ही प्रचार में जुटे रहते हैं। पिछले पांच साल में शायद ही कोई एक दिन ऐसा आया हो, जब रात के समय उन्होंने घर पर खाना खाया हो। जनता के प्रति इसी प्यार व ईमानदारी के कारण उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का खिताब मिला है। अब जनता के ईनाम देने की बारी है।
- नीलम बतरा, विधायक बी. बी. बतरा की धर्मपत्नी (कांग्रेस प्रत्याशी, रोहतक हलका)।
सास प्रचार तो बहू घर की संभाल रहीं कमान
अब तो सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाती हूं। फिर तो रात डेढ़ बजे ही सोना होता है। पूरा दिन कार्यकर्ताओं को संभालने, उनके खाने का प्रबंध देखने और डोर-टू-डोर प्रचार में बीतता है। 52 साल की उम्र में थकान तो होती ही है। बहू सौम्या ग्रोवर ने घर व रसोई की कमान संभाल रखी है, इससे राहत है। शाम 4 से 8 बजे तक टीम के साथ प्रचार पर निकलती हूं। मंदिर या गुरुद्वारा दिखे तो मत्था टेकना नहीं भूलती। नेताजी तो सुबह 6:15 बजे ही चाय पीकर प्रचार पर निकल जाते हैं। सुबह 10 बजे घर पर नाश्ते के बाद तो रात 11 या 12 बजे ही आना होता है। दो महीने से 24 घंटे रसोई चल रही है। भगवान ने सुनी तो उन्हें लेकर व्यास में गुरु के दर्शन करने जाऊंगी।
- वीना ग्रोवर, पत्नी, मनीष ग्रोवर (भाजपा प्रत्याशी, हलका रोहतक)।