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बीसीआईएम इकोनॉमिक कॉरिडोर
अमर उजाला दिल्ली
Updated Wed, 19 Feb 2014 07:18 PM IST
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चीन के साथ बेहतर व्यापारिक रिश्ते कायम करने के लिए हाल ही में बीसीआईएम इकोनॉमिक कॉरिडोर के चीन के प्रस्ताव पर भारत ने सहमति जताई है। बीसीआईएम इकोनॉमिक कॉरिडोर भारत, बांग्लादेश, चीन एवं म्यांमार के बीच रेल एवं सड़क संपर्क परियोजना है, जिसके तहत चीन के यून्नान प्रांत को मंडाले, ढाका एवं चटगांव होते हुए पश्चिम बंगाल के कोलकाता से जोड़ा जाएगा।
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उम्मीद की जा रही है कि इस परियोजना से बहुरूपीय संपर्क, एक दूसरे के आर्थिक संसाधनों का उपयोग, व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा मिलेगा और चारों देशों के लोग एक दूसरे के संपर्क में आएंगे। चीन तो बीसीआईएम कॉरिडोर की बात 1990 के दशक से ही कर रहा है, लेकिन भारत इससे इन्कार करता रहा है। भारत के विदेशी मामले और सुरक्षा से जुड़े संस्थान चीन के साथ किसी भी तरह के स्थलीय संपर्क परियोजनाओं के खिलाफ अनिच्छा जताते रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध अच्छे नहीं रहे हैं और सीमा विवाद का भी समाधान नहीं हुआ है।
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इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्राचीनकालीन दक्षिणी सिल्क रोड को पुनर्जीवित करना है। यह कॉरिडोर आसपास के बड़े एवं मध्यम दर्जे के शहरों के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसकी व्यवहार्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में दुनिया की 40 फीसदी आबादी रहती है। अगर यह कॉरिडोर स्थापित हो गया, तो पूर्वी एशिया और दक्षिणी एशिया के बीच यह सेतू का काम करेगा। यही नहीं, यह कॉरिडोर आपसी विवादों में फंसे रहने वाले देशों को सहयोगी बनाने की क्षमता रखता है। लेकिन यह तभी हो सकता है, जब सभी पक्ष सकारात्मक रवैया अपनाएं।
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