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Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Bawal area of 16 villages over land acquisition court bans

बावल क्षेत्र के 16 गांवों की जमीन अधिग्रहण पर कोर्ट ने लगाई रोक

Sat, 07 Jun 2014 12:20 AM IST
rewari
rewari Updated Sat, 07 Jun 2014 12:20 AM IST
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 बावल में विकसित किए जाने वाले मल्टी लाजिस्टक हब के लिए एचएसआईआईडीसी को झटका लगा है। मल्टी लाजिस्टक हब के लिए अधिग्रहित की जाने वाली 16 गांवों की 3664 एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर रोक लगाने के लिए  गठित भूमि अधिग्रहण विरोध संघर्ष समिति ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने समिति की याचिका पर अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि बावल क्षेत्र के 16 गांवों की अधिग्रहण की जाने वाली इस जमीन पर मानेसर की तर्ज पर बावल को आईएमटी का दर्जा देने के मल्टी लाजिस्टक हब का विकास किया जाना है। इसके लिए सरकार ने 3664 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की नोटिस प्रक्रिया शुरू की थी जिसके बाद वर्ष 15 जुलाई 2012 में अधिग्रहण के विरोध में पहुंचे किसानों ने यहां पर जमकर हंगामा किया और सचिवालय में भी तोड़फोड़ की जिसके बाद प्रशासन की ओर से काफी संख्या में किसानों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।
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इसके बाद 22 जुलाई 2012 को जब आसलवास मे इस जमीन अधिग्रहण के खिलाफ महापंचायत का आयोजन किया गया था तब भी यह आंदोलन हिंसक हो गया था और इस दौरान हुई फायरिंग में एक पुलिसकर्मी के अलावा तीन किसान भी घायल हो गए। इसके बाद हुए उपद्रव के बाद ग्रामीणों ने दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर राजस्थान-हरियाणा रोडवेज की 20 से अधिक बसों के अलावा 50 वाहनों को आग के हवाले कर दिया था।
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 इसके बाद इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे और किसानों से बातचीत करने के लिए उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला, स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह और मुख्य संसदीय सचिव राव दानसिंह की अगुवाई में बनी मंत्रियों की टीम ने किसानों से बातचीत की लेकिन किसान अधिग्रहण प्रक्रिया को ही रद करने की मांग पर अड़े रहे।

 इसके बाद मंत्रियों और संघर्ष समिति के बीच करीब डेढ़ साल तक यह बातचीत चलती रही लेकिन यह बात निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची जिसके बाद इसी वर्ष मई माह में भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति ने पत्रकार वार्ता और महापंचायत का आयोजन करके मंत्रियों से इस मामले में बातचीत करने से साफ इंकार कर दिया और नई अधिग्रहण नीति के तहत जमीन अधिग्रहण करने की मांग की थी।

नई नीति के तहत अधिग्रहण नहीं करने पर समिति ने सरकार को कोर्ट जाने की चेतावनी दी थी जिसके तहत समिति ने अब कोर्ट में याचिका दायर की है।

सेक्शन 7 तक के नोटिस की हो चुकी है प्रक्रिया
इस जमीन अधिग्रहण के लिए सेक्शन 7 तक की नोटिस प्रक्रिया हो चुकी है और सेक्शन 9 के नोटिस होेने के बाद जमीन से संबंधित सभी प्रक्रिया पूरी हो जाती लेकिन उससे पहले ही किसानों के समर्थन समिति द्वारा हाईकोर्ट में जाने के कारण यह मामला अब खटाई में पड़ गया है और सितंबर माह में सरकार का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है जिसके कारण संभावना मानी जा रही है कि जीत अब इस मामले में किसानों की हो सकती है।


 संघर्ष समिति के जिला प्रधान रामकिशन महलावत ने बताया कि किसानों की ओर से उन्हें और भजनलाल आसलवास को प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि अधिग्रहण के विरोध में जस्टिस एसएस सारोन और लिसागिल की संयुक्त ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए इन 16 गांवों की जमीन के अधिग्रहण पर रोक लगा दी है। ग्रामीणों की तरफ से एडवोकेट विकास चौधरी और डॉ.सूरत सिंह ने पैरवी की। इस मामले अगली सुनवाई 11 अगस्त 2014 को होगी।
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