दबंगों की लड़ाई में क्रिकेट

नई दिल्ली Updated Wed, 07 May 2014 07:51 PM IST
विज्ञापन
Battle of black listed cricketer

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
पूर्व विवादास्पद आईपीएल आयुक्त और आजीवन प्रतिबंधित ललित मोदी का राजस्थान क्रिकेट संघ का अध्यक्ष चुना जाना अगर हैरान करने वाला था, तो बीसीसीआई द्वारा संघ को ही एक झटके में निलंबित कर देने का फैसला निरंकुशतापूर्ण और जल्दबाजी भरा है।
विज्ञापन

क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इस मामले में थोड़े संयम का परिचय इसलिए भी देना चाहिए था, क्योंकि राजस्थान क्रिकेट संघ का चुनाव सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में हुआ था, और उसने यह कहा भी था कि बीसीसीआई उचित मंच पर इस चुनाव को चुनौती दे सकती है।
तर्क तो यह भी दिया जा रहा है कि संघ का संचालन राजस्थान स्पोर्ट्स ऐक्ट के तहत होता है, जिसमें बीसीसीआई का बहुत दखल नहीं है। ऐसे में, बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष ने बिना कोई बैठक बुलाए, राजस्थान क्रिकेट संघ का पक्ष जाने बगैर एक व्यक्ति की सजा जिस तरह पूरे संगठन को दी है, उससे तो यही लगता है कि श्रीनिवासन को फिलहाल हाशिये पर डाल देने के बावजूद चल उन्हीं की रही है।
हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं कि ललित मोदी निर्दोष हैं। भारत में आईपीएल की शुरुआत करने का उन्हें जितना श्रेय जाता है, उससे कहीं अधिक इस खेल को बदनाम करने में उनका हाथ रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी के इतने गंभीर मामले पाए हैं कि इंटरपोल की मदद से उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। अगर वह निर्दोष होते, तो लंदन में रहने के बजाय अपने खिलाफ चल रहे मामलों का सामना करने भारत आते। पर इसके बजाय भारत में लोकसभा चुनाव के बाद सरकार बदलने की संभावना को अब वह अपनी वतन वापसी के चोर दरवाजे की तरह देख रहे हैं।

क्या विद्रूप है कि जिस शख्स पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, वह क्रिकेट को साफ-सुथरा बनाने की बात कर रहा है। पर अब तक श्रीनिवासन के निरंकुश तौर-तरीकों पर चुप्पी साधे दिग्गज भी ललित मोदी के बहाने जिस तरह उन पर निशाना साधने की कोशिश में लगे हैं, वह देखने लायक है। मोदी और श्रीनिवासन की अहं की लड़ाई पुरानी है, पर इसका खामियाजा क्रिकेट क्यों भुगते? भारतीय क्रिकेट को पारदर्शी बनाने के लिए अगर श्रीनिवासन जैसों से छुटकारा चाहिए, तो उसे ललित मोदी से भी उतनी ही दूरी बनाने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us