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बाजार में बैडमिंटन

Tue, 23 Jul 2013 08:40 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 23 Jul 2013 08:40 PM IST
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Badminton in market

बाजार में खिलाड़ियों की नीलामी का अनुभव हमारे यहां आईपीएल में तो अच्छा नहीं ही रहा, अब आईबीएल यानी इंडियन बैडमिंटन लीग की शुरुआत भी जिस विवाद के साथ हो रही है, वह भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

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डबल्स की दो शानदार खिलाड़ियों ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा के साथ हुए सुलूक से यही संदेश जाता है कि इस तरह के आयोजनों में प्रतिभा नहीं, बल्कि बाजार ही खिलाड़ी की कीमत तय करता है। इन दोनों को आइकन खिलाड़ी का दर्जा दिया गया, लेकिन जब इनके खरीदार नहीं मिले, तो आईबीएल से महिलाओं के डबल्स मुकाबले हटा दिए गए और इनका आधार मूल्य भी आधा कर दिया गया! अब सिर्फ यही दोनों अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत नहीं कर रहीं, बल्कि कुछ और उभरते खिलाड़ी भी नीलामी में अपनी अनदेखी का दर्द साझा कर रहे हैं।
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इसके बावजूद अपने देश में बैडमिंटन के इस व्यावसायिक आयोजन की शुरुआत का स्वागत करना चाहिए, तो सबसे ज्यादा इसलिए कि अब क्रिकेट के साथ-साथ दूसरे खेलों का महत्व बढ़ रहा है; आखिर इसी साल देश में हॉकी इंडिया लीग की भी शुरुआत हुई है।
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बैडमिंटन में प्रकाश पाडुकोण की यादगार उपलब्धि के बाद देश को वैसी ही अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए पुलेला गोपीचंद के रूप में करीब दो दशक तक इंतजार करना पड़ा था। लेकिन पिछले एक दशक में साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन को जैसी वैश्विक पहचान दी है, वह अभूतपूर्व है। ओलंपिक में कांस्य पदक के अलावा दूसरे नंबर की रैंकिग तक पहुंचने वाली वह इकलौती भारतीय हैं। वैश्विक मंच पर साइना ने जहां चीन के वर्चस्व को चुनौती दी, वहीं उनकी उपलब्धियों से देश में बैडमिंटन के प्रति एक सकारात्मक माहौल भी बना है और अनेक युवतर खिलाड़ी उभरे हैं।



आईबीएल इन खिलाड़ियों को अच्छी कीमत देने के साथ ही उन्हें एक बड़ा मंच भी मुहैया करा रही है। पी वी सिंधु, प्रदन्या गादरे और पी कश्यप जैसे खिलाड़ी जब ली चोंग वेई, साइना नेहवाल और जूलियन शेंक जैसों के साथ खेलेंगे, तो उनकी प्रतिभा और निखरकर ही सामने आएगी। आईबीएल के प्रति उम्मीद जताते हुए हालांकि यह कामना भी करनी होगी कि इसका हश्र आईपीएल जैसा न हो, जिसमें व्याप्त भ्रष्टाचार ने उसके उद्देश्य को फीका कर दिया।

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