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एटीएम का क्लोन बना हुई खातों से चोरी

Sat, 29 Nov 2014 02:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 29 Nov 2014 02:55 AM IST
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बिना एटीएम कार्ड बदले और पासवर्ड पूछे दादरी निवासी चार लोगों के खातों से रोहतक में पैसा निकालने का मामला पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है।
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वारदात एटीएम क्लोन कर अंजाम दी गई है।

इसकी पुष्टि देश के प्रमुख साइबर क्राइम एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने की है। एसपी रोहतक भी इसे मान रहे हैं। शहर में एटीएम क्लोन की यह पहली वारदात सामने आई है।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गिरोह को काबू करने के साथ पूरा खुलासा करना भी है। स्थानीय पुलिस भी असमंजस में है कि जांच कहां से शुरू की जाए।  
यूं देते हैं वारदात को अंजाम
साइबर क्राइम एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बताया कि इस तरह की वारदात पहले नोएडा, गुड़गांव में सामने आ चुकी है। कई गिरोह देशभर में सक्रिय हैं। यह गिरोह शॉपिंग कांप्लेक्स, पेट्रोल पंप, होटल्स, एटीएम बूथ में रिकॉर्डिंग डिवाइस का प्रयोग कर डाटा हैक कर लेते हैं और एटीएम का क्लोन तैयार कर किसी भी एटीएम से संबंधित खाते से पैसा निकाल लेते हैं।
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यूं होता है एटीएम क्लोन तैयार
जिस प्लास्टिक से एटीएम कार्ड तैयार होते हैं, उसी से रोजमर्रा की जिंदगी में प्रयोग होने वाले कई अन्य कार्ड (शॉपिंग मॉल आदि में प्रयोग करने वाले कार्ड, होटल के कार्ड) बनते हैं। एटीएम क्लोनर इस तरह के कार्ड पहले ही तैयार करवा लेते हैं, क्योंकि यह प्लास्टिक और एटीएम साइज आसानी से मार्केट में उपलब्ध है। ये क्लोनर एटीएम कार्ड को एक छोटे से डिवाइस एटीएम कार्ड रिकॉर्डर पर स्वाइप कर देते हैं। इससे कार्ड के पीछे बनी मैग्नेटिक टेप का डाटा हैक किया जाता है।
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इस तरह पहुंचा जा सकता है अपराधियों तक
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि  मामला पेचीदा है, लेकिन अपराधियों तक पहुंचना मुमकिन है। जरूरत गहनता से जांच की है। जांच की शुरुआत पीड़ितों से ही करनी चाहिए, सुराग भी वहीं से मिलेगा।
- पीड़ितों से पुलिस पूरी डिटेल हासिल करे कि उन्होंने कहां-कहां एटीएम कार्ड का प्रयोग किया है? वहीं से पुलिस को एटीएम क्लोनिंग का सुराग लग सकता है।
- बैंक के एटीएम का रिकॉर्ड जुटाया जाए। किस किस स्तर पर पैसा निकाला गया। इस रिकार्ड से भी पुलिस को काफी सुराग मिल सकते हैं।
- बैंक के एटीएम की भी जांच की जानी चाहिए। इस तरह का गिरोह एटीएम के उस स्थान पर एक नकली एटीएम मुंह लगा देता है जिसे आसानी से आम व्यक्ति नहीं पहचान सकता है। इस नकली मुंह में एटीएम रिकॉर्डर होता है। जैसे ही व्यक्ति कार्ड डालता है तो उस रिकॉर्डर से पूरी डिटेल हैकर जुटा लेता है। ऐसा खासकर उन स्थानों पर होता है जहां गार्ड नहीं होता है।
- पिन जानने के लिए एटीएम क्लोनर एटीएम चैंबर में कहीं भी पिन रिकॉर्डर लगा देता है।
आप यूं बच सकते हैं क्लोनिंग से
- एटीएम कार्ड खुद स्वाइप करें।
- दूसरे हाथ से ढक कर एटीएम कार्ड का पिन दबाना चाहिए।   
- कार्ड के पीछे हस्ताक्षर करना जरूरी है।
- कार्ड के पीछे छपे तीन अंकों के सीवीवी (कार्ड वेरीफिकेशन वेल्यू) कोड को कहीं अन्य स्थान पर सेव कर तुरंत मिटा देना चाहिए।
- किसी को भी एटीएम कार्ड का नंबर, पिन नंबर और खाता संबंधित जानकारी नहीं देनी चाहिए। कोई नियम नहीं है कि कोई बैंक अधिकारी आपको कभी फोन कर जानकारी मांगे।

- एटीएम में पर्ची साबुत हालत में नहीं फेंकनी चाहिए। फेंकनी भी है तो उसे पूरी तरह फाड़ कर फेंके।
विशेष टीम करेंगे गठित
‘रोहतक में आने के बाद जांच की तो सामने आया कि एटीएम से पैसा निकालने, एटीएम क्लोन कर पैसा निकालने के काफी मामले लंबित हैं। सारा मामला साइबर तकनीकी से जुड़ा है, इसलिए इनकी जांच के लिए भी टेक्निकल लोगों की जरूरत है। विभाग में साइंस एक्सपर्ट्स की तलाश कर स्पेशल टीम तैयार की जाएगी और उन्हें केवल एटीएम से जुड़े मामले ही सौंपे जाएंगे।’ शशांक आनंद, एसपी, रोहतक।
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