फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   arunachal towards stability

स्थिरता की ओर अरुणाचल

Fri, 19 Feb 2016 09:10 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Feb 2016 09:10 PM IST
विज्ञापन

अरुणाचल प्रदेश में यथास्थिति बनाए रखने का अपना फैसला पलटकर सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया है, तो इसे समझा जा सकता है। दरअसल पिछले बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश करने के कुछ ही देर बाद शीर्ष अदालत ने निर्देश जारी किया था कि जब तक वह चौदह बागी कांग्रेसी विधायकों को निलंबित करने के पूर्व स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने के हाई कोर्ट के निर्णय की जांच नहीं कर लेती, तब तक सूबे में यथास्थिति बरकरार रखी जाए। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने इस मामले में संतुष्ट होने के अगले ही दिन नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर अरुणाचल को राजनीतिक अस्थिरता से निकालने की दिशा में पहल की है। दरअसल कांग्रेस का तर्क था कि उसके चौदह विधायकों को अयोग्य ठहरा देने के बाद विधानसभा की संख्या घटकर चौवालीस रह गई है, और इस लिहाज से नबाम तुकी बहुमत में हैं। पर अदालत ने चूंकि उन विधायकों को अयोग्य ठहरा देने के फैसले पर ही रोक लगा दी है, ऐसे में तुकी के बहुमत में होने का तर्क नहीं टिकता। बेशक इस मामले में राज्यपाल ने जिस पक्षपाती रवैये का परिचय दिया, वह दुर्भाग्यपूर्ण था; खुद शीर्ष अदालत ने उसे गंभीरता से लिया था। पर विधानसभा में बहुमत खो चुकने के बाद जोड़-तोड़ से सरकार चलाने की कांग्रेस की मंशा का भी समर्थन नहीं किया जा सकता था। राज्य में केंद्र की सत्ता के अनुरूप सरकार बनाने की कोशिश कोई पहली बार नहीं हुई, लेकिन मौजूदा प्रसंग में सबसे चिंताजनक यह है कि विधानसभा चुनाव के करीब दो साल बीतने के बावजूद वहां मतदाताओं की उम्मीदें पूरी करने की दिशा में नहीं सोचा गया। पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने न तो प्रशासन के मोर्चे पर कुशलता का परिचय दिया था, न ही आर्थिक मुद्दों पर। चूंकि नई सरकार केंद्र के समर्थन और मदद से बन रही है, ऐसे में उम्मीद करनी चाहिए कि उस अरुणाचल पर पर्याप्त ध्यान दिया जाएगा, जो न सिर्फ विकास और शांति का आकांक्षी है, बल्कि जिसे अपने नक्शे में दिखाकर चीन भी जब-तब दबाव बनाने की कोशिश करता है।

विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed