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हे प्रभु! रेल पर कुछ कृपा कीजिए

Thu, 25 Feb 2016 03:01 PM IST
आशुतोष चतुर्वेदी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
आशुतोष चतुर्वेदी/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Feb 2016 03:01 PM IST
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article of ashutosh chaturvedi on union rail budget

हे प्रभु! रेल पर कुछ कृपा कीजिए

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इधर पिछले कुछ समय से रेल मंत्री सुरेश प्रभु मीडिया को लेकर बेहद संवेदनशील हो गए हैं। उन्हें लगता है कि वह ठीक ठाक काम कर रहे हैं लेकिन मीडिया उनकी छवि नकारात्मक बना रहा है। यही वजह है कि बजट से पहले वे मीडिया वालों से मिले और रेल बजट को लेकर उनसे सलाह मशविरा किया। दरअसल सुरेश प्रभु को बड़े गाजे बाजे के साथ सरकार में लाया गया था। उनके लिए शिव सेना से भी नाराजगी भी मोल ली गई। लेकिन माना जा रहा है कि वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। स्टेशनों की हालत ठीक नहीं है। ट्रेनें समय पर नहीं चल रहीं। किराया तो नहीं बढ़ा लेकिन केंसीलेशन से लेकर अन्य अनेक चार्ज बढ़ा दिए गए हैं। डायनमिक फेयर भी लोगों के गले नहीं उतर रहा। जबकि उनके राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को लाइट वेट माना जा रहा था लेकिन पिछले कुछ समय में उन्होंने पार्टी नेताओं को अपने कामकाज और सक्रियता से प्रभावित किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही गति रही तो पलड़ा धीरे धीरे मनोज सिन्हा के पक्ष में झुक सकता है।

हरियाणा की आग में झुलसे खट्टर

हरियाणा में जाट आरक्षण की आग में सबसे अधिक झुलसे हैं तो वह मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं। चार दिन राज्य में कोई सरकार नहीं थी, कोई कानून व्यवस्था नहीं थी और उपद्रवियों ने जमकर लूटपाट की। खट्टर प्रशासनिक दृष्टि से निष्प्रभावी साबित हुए। सेना तो तैनात हो गई लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं कर पाए। अब जैसे जैसे नुकसान का आकलन सामने आएगा, वैसे वैसे उनकी स्थिति और कमजोर होगी। इधर उनके मंत्रिमंडल के सदस्य आपस में भिड़े हुए हैं। कृषि मंत्री ओपी धनकड़ ने तो ट्वीट कर मरने वालों को 10-10 लाख मुआवजे और सरकारी नौकरी की घोषणा कर दी। इस पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज फैल गए और उन्होंने आपत्ति जताई की नुकसान जिनका हुआ, उन्हें सरकार से सहायता की अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई। बताते हैं कि केंद्रीय मंत्री वैंकया नायडू की अदालत में इसका फैसला होगा।
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राहुल से नाखुश कांग्रेसी


जेएनयू प्रकरण पर पक्ष विपक्ष में तलवारें खिचीं हुईं हैं। जमकर राजनीति हो रही है लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राहुल गांधी के जेएनयू जाने और बेवजह इस विवाद में कूदने से नाखुश हैं। भाजपा ने इसे देशभक्ति बनाम देशद्रोह के मामले में तब्दील करने की कोशिश की है। बताते हैं कि अजय माकन ने युवाओं का मामला बताकर राहुल गांधी को जेएनयू जाने और छात्रों से मिलने की सलाह दी। बस राहुल आनन फानन में जेएनयू पहुँच गए। भाजपा ने सोशल मीडिया के सहारे इसका जमकर प्रचार किया कि राहुल अफजल गुरू का समर्थन करने वाले लोगों के साथ खड़े हैं। कांग्रेस के नेता इस संदेश से सकते में हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी को कौन समझाए कि यूपी में दलित कॉनक्लेव करने से पार्टी को दलितों का एक भी वोट हासिल नहीं होने जा रहा। वह पूरी तरह बहनजी के साथ रहने वाला है। ब्राह्नण और पिछड़ों पर ध्यान देने की जरूरत है, राहुल उस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। साथ ही जेएनयू जैसा संदेश लोगों में अगर चला गया तो कांग्रेस की रही सही कसर भी यूपी चुनावों में पूरी हो जाएगी।

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